rashi sharma
rashi sharma 27 Aug, 2022 | 0 mins read

मैं सफलता ऐसी हूँ..................

मेरे आने पर घंमड़ ना कर, मेरे जाने पर पागल ना बन.

Reactions 0
Comments 0
220
rashi sharma
rashi sharma 26 Aug, 2022 | 1 min read

कभी तो...............

माना कि हम सबकुछ कर सकते है, हर चीज़ को हासिल कर सकते है, पर कभी तो ड़रना भी चाहिए, गलत सोच और गलत काम से गुरेज़ करना भी चाहिए.

Reactions 0
Comments 0
182
rashi sharma
rashi sharma 25 Aug, 2022 | 1 min read

मैं रेत की तरह ...........

कमाल है ऐ रेत भी, चमकती है ऐ रेत भी, दर्पण है समाज का कहानी कहती है रेत भी, साहिल का किनारा इसका है सारा, बदलती है खुद को ऐसे जैसे पूरा जहान है इसका, सारा का सारा.

Reactions 0
Comments 0
172
rashi sharma
rashi sharma 24 Aug, 2022 | 1 min read

मैं गुस्सा.................

खराब वक्त की घंटी हूँ मैं, तबाही की दस्तक हूँ मैं, हर शय है घर मेरा, भगाओं मुझे नहीं तो खा जाऊँगा मैं.

Reactions 0
Comments 0
209
rashi sharma
rashi sharma 22 Aug, 2022 | 1 min read

गहराई................

बातों में गहराई है, व्यकत्तिव में समाई है.

Reactions 0
Comments 0
200
rashi sharma
rashi sharma 21 Aug, 2022 | 1 min read

उसकी हर बात जुदा..................

तू है तो सब कुछ है, तू साथ है तभी तो सारी बात है, रात की चांदनी है तुझसे, मेरी सुबह भी तुझसे ही गुलज़ार है.

Reactions 0
Comments 0
215
rashi sharma
rashi sharma 20 Aug, 2022 | 1 min read

सर्दी का साथ................

ना किसी से शिकायत है, ना किसी को कम आंकते है, हम कायल है सर्दी के बस इतना ही हम जानते है.

Reactions 0
Comments 0
222
rashi sharma
rashi sharma 18 Aug, 2022 | 1 min read

"मुझे मेरी फिक्र हैं"

माना कि मैं हमेशा शांत नहीं रहता, मगर पहले जितना जिंदादिल भी नहीं रहता, बेपरवाही मेरी ही पहचान है, अब देखों मैं मौसम खुद से ही अंजान है.

Reactions 0
Comments 0
224
rashi sharma
rashi sharma 17 Aug, 2022 | 1 min read

समय का कर्म............

संवारने को आऊँ तो ज़मीन के तिनके को भी आसमान पर टांग दूँ, मैं समय सबका नसीब संवार दूँ, ना हुक्म सुनता हूँ ना अर्ज़ी, मन का मालिक हूँ मैं एक जगह टिकता भी नहीं मैं.

Reactions 0
Comments 0
228
rashi sharma
rashi sharma 12 Aug, 2022 | 1 min read

ऐ कहाँ आ गए हम..............

सब जानते है फिर भी सवाल करते है, क्यों है यहाँ ऐ भी पूछते है, पहचानी जगह भी अब, पहचान मे नहीं आती, क्यों इस कदर अनजान हो गए हम.

Reactions 0
Comments 0
231