तेरे इंतज़ार में...................
जागती आँखों से तुझे याद करते है, बंद आँखों से तेरा दीदार करते है, नहीं बताते किसी को कि तू कैसा दिखता है, हमें क्या मालूम कि क्या तू मेरी कल्पना जैसा ही दिखता है.
वो और हम..............
उसका नाम बदल देता है, उसके आगे सब फिका लगता है, शांति के करीब वहीं तो ले जाता है, सुकून से वो राब्ता कराता है.
उसकी हर बात जुदा..................
तू है तो सब कुछ है, तू साथ है तभी तो सारी बात है, रात की चांदनी है तुझसे, मेरी सुबह भी तुझसे ही गुलज़ार है.
Know your Almighty Mind
Realise the Power of mind
##happiness ##subconscious mind ##mind ##sorrow
कैलाश रमण............
वो अलबेला वो एकलौता हैं, मतवाला हैं वो, अपनी मर्ज़ी का मालिक सही, भक्तों की सुनने वाला है वो.
संधि
ये एक छोटी सी रचना है, जो संधि की आकांक्षा करते हुए उस अमृत की प्राप्ति को सबल रूप से अभिव्यक्त करने का प्रयास है।
तप
ये कृति मेरी वर्षा के मूल तप की चर्चा करती है, मेरी सामान्य साहित्यिक बोध से पिरोहे है मैंने इस रचना में ये शब्द, और ये अर्पण करता हूँ मैं, मेरे इष्ट - सूर्य को।✍️
राह
यात्रा जब भी हो अंतर की ही हो.. मैंने जाना है की बाहर छल है, गरल है.. काल दयावान है कारण है की चाहता है हम सूक्ष्म जाए.. अन्यथा.. सब माया है एक काया है, भेद ना कोई जान पाया है..।
Topics View All →
Languages
Trending This Month
Have a story to tell?
Share your thoughts, experiences, and creativity with thousands of avid readers.