Saket Ranjan Shukla
24 Feb, 2022 | 1 min read
हूँ कितना भाग्यशाली मैं
हूँ कितना भाग्यशाली मैं
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Tulika Das
23 Feb, 2022 | 1 min read
उठाती हूं जब जब कलम , तुम्हें करीब पाती हूं
शब्दों से तुम्हें छू लेती हूं , जी लेती हूं तुम्हें थोड़ा
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Vinita Tomar
21 Feb, 2022 | 1 min read
वक्त की स्याही - कुछ अधूरी बातें।
वक्त तो बीतता जाता है, वो कभी ठहरता नहीं ।लेकिन फिर भी कुछ अधूरी ख्वाहिश होती हैं जो जहन में आती रहती हैं।
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Ektakocharrelan
21 Feb, 2022 | 1 min read
ब्याह ना करना
ऐ बच्चियों जब तलक पैरों पर हो ना खड़ी
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आशिक़ी ऐसे ही उड़ान भरती है
Saket Ranjan Shukla
24 Jul, 2026 | 1 min read