rashi sharma
02 Sep, 2022 | 1 min read
rashi sharma
30 Aug, 2022 | 0 mins read
अप्रवासी..............
कौन रोक सकता है जाने वाले को, जब मन बना ही लिया है उसने समुद्र पार करने का, तो भला कोई कैसे रूक सकता है, देख के नम आँखों को.
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rashi sharma
29 Aug, 2022 | 0 mins read
वाबस्ता.................
हर कोई किसी ना किसी से ज़ड़ा हुआ है, चाहे - अनचाहे बंधा हुआ है, कोशिश कर लो कितना ही छुड़ाने की, बांधने वाले ने बड़ी तसल्ली से पकड़ रखा है.
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Saket Ranjan Shukla
29 Aug, 2022 | 1 min read
गुम हैं होश-ओ-हवास मेरे
गुम हैं होश-ओ-हवास मेरे
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Vinita Tomar
29 Aug, 2022 | 1 min read
पानी और मेरा जीवन !!
पानी की महत्ता और जीवन की धारा को एक साथ प्रदर्शित करती ये काव्य प्रस्तुति।
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