rashi sharma
17 Aug, 2022 | 1 min read
समय का कर्म............
संवारने को आऊँ तो ज़मीन के तिनके को भी आसमान पर टांग दूँ, मैं समय सबका नसीब संवार दूँ, ना हुक्म सुनता हूँ ना अर्ज़ी, मन का मालिक हूँ मैं एक जगह टिकता भी नहीं मैं.
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