इबादत ईश की
इबादत ईश की हे वाहेगुरु जी आपके बारे में क्या लिखूं जब भी देखती हूं किसी को मुस्कुराते उसके रूप में तुम्हीं नज़र आते हो।
हे ईश्वर! मैं आपको स्मरण करती हूं
हे ईश्वर आपके जिस स्वरुप को हम हृदय में रखते है बस उसकी वंदना करते है, परन्तु आप के अनंत रूप है।
#God
मेरे गुरूदेव
गुरू मेरा जीवन गुरू मेरी पूजा तुम बिन है कोई दूजा
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ईश्वर का सार
ईश्वर तो कई रूप में ढलते हैं। कभी धूप या छाँव तो कभी बारिश की तरह बरसते हैं।।
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