rashi sharma
28 Aug, 2022 | 0 mins read
rashi sharma
27 Aug, 2022 | 0 mins read
rashi sharma
24 Aug, 2022 | 1 min read
मैं गुस्सा.................
खराब वक्त की घंटी हूँ मैं, तबाही की दस्तक हूँ मैं, हर शय है घर मेरा, भगाओं मुझे नहीं तो खा जाऊँगा मैं.
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rashi sharma
22 Aug, 2022 | 1 min read
गहराई................
बातों में गहराई है, व्यकत्तिव में समाई है.
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rashi sharma
18 Aug, 2022 | 1 min read
"मुझे मेरी फिक्र हैं"
माना कि मैं हमेशा शांत नहीं रहता, मगर पहले जितना जिंदादिल भी नहीं रहता, बेपरवाही मेरी ही पहचान है, अब देखों मैं मौसम खुद से ही अंजान है.
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rashi sharma
17 Aug, 2022 | 1 min read
समय का कर्म............
संवारने को आऊँ तो ज़मीन के तिनके को भी आसमान पर टांग दूँ, मैं समय सबका नसीब संवार दूँ, ना हुक्म सुनता हूँ ना अर्ज़ी, मन का मालिक हूँ मैं एक जगह टिकता भी नहीं मैं.
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rashi sharma
12 Aug, 2022 | 1 min read
ऐ कहाँ आ गए हम..............
सब जानते है फिर भी सवाल करते है, क्यों है यहाँ ऐ भी पूछते है, पहचानी जगह भी अब, पहचान मे नहीं आती, क्यों इस कदर अनजान हो गए हम.
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rashi sharma
08 Aug, 2022 | 1 min read
ग़मगीन है.................
खत्म नहीं होता ग़म, बस गुज़र जाता है, अगले ही पल में वापस आ जाता है, माना कि तेरे ना होने से खुशी का एहसास कैसे होगा, पर तू भी सोच तेरे साथ लम्बें अर्से तक जीना कितना मुश्किल होगा.
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