rashi sharma
rashi sharma 30 Nov, 2022 | 1 min read

शायरों की बस्ती....................

वो गली हमारी है, जहां हम और हमारी कलम रोज़ाना कुछ नया लिखते है, कुछ सुना देते है लोगों को, कुछ को ज़हन में ही दफन कर देते है.

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rashi sharma
rashi sharma 26 Nov, 2022 | 1 min read

नज़रों का फर्क....................

आँखों में चकरा नहीं, सोच में है, कम्बख्त हम सोच पर पहरा नहीं लगाते, लेकिन नज़रों पर पर्दा गिरा देते है.

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rashi sharma
rashi sharma 24 Nov, 2022 | 0 mins read

बिगड़ता नहीं मैं..................

ना बुरी लत है, ना ही समय की बेकद्ररी, मैं हूँ समझदार सा, बिगड़ैल नहीं.

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rashi sharma
rashi sharma 22 Nov, 2022 | 0 mins read

चलो अभ्यास करें...................

चलों अभ्यास करें.

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rashi sharma
rashi sharma 15 Nov, 2022 | 0 mins read

मैं साझेदार..................

ना हुड़क हूँ, ना लत हूँ, मैं तो अकेलेपन का मित्र हूँ.

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rashi sharma
rashi sharma 14 Nov, 2022 | 0 mins read

हर रात..................

जीवंत रात्रि की कहानी

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