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fazal Esaf
fazal Esaf 05 Jul, 2025 | 1 min read

"मदीना को लिखे गए ख़त"

हर जुमे की सुबह एक बूढ़ा आदमी अपने दिल के टुकड़े काग़ज़ पर रख देता था — मदीना के नाम।" ‘मदीना को लिखे गए ख़त’ एक रूहानी, मोहब्बत-भरी कहानी है, जो इबादत और इंतज़ार के धागों से बुनी गई है। गुलज़ार की नज़्मों की तरह नरम, और दिल को छू लेने वाली इस कहानी में, एक पोती अपने दादा के उन ख़ामोश ख़तों को पढ़ती है, जो मदीना को नहीं, बल्कि अल्लाह से की गई एक धीमी, टूटती बातचीत होते हैं। यह कहानी है उन अल्फ़ाज़ों की जो कभी भेजे नहीं जाते, उन दुआओं की जो जवाब नहीं मांगतीं—बस यकीन रखती हैं।

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fazal Esaf
fazal Esaf 02 Jun, 2025 | 1 min read

हिजाब वाली लड़की

कहानी का विस्तृत सारांश यह कहानी आयशा नाम की एक युवा मुस्लिम छात्रा के बारे में है जो मुंबई के एक आधुनिक कॉलेज में हिजाब पहनकर आती है, लेकिन उसे अपने पहनावे के कारण सहपाठियों के उपहास और पूर्वाग्रह का सामना करना पड़ता है। शुरुआत में आयशा इन टिप्पणियों को नज़रअंदाज़ करती है, लेकिन एक दिन कैंटीन में कुछ छात्रों द्वारा उसके हिजाब और उसकी बौद्धिक क्षमता को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी उसे बोलने पर मजबूर कर देती है। आयशा बड़े ही शांत और दृढ़ स्वर में उन छात्रों को चुनौती देती है। वह सवाल करती है कि क्या हिजाब पहनने से "न्यूरॉन्स" काम करना बंद कर देते हैं और क्या विज्ञान में ऐसा कोई प्रमाण है जो यह बताता हो कि कपड़ों का एक टुकड़ा सोचने की क्षमता को प्रभावित करता है। वह स्पष्ट करती है कि हिजाब उसकी आस्था का प्रतीक है और इसे पहनकर वह सुरक्षित और सहज महसूस करती है। आयशा के सवाल केवल उसके व्यक्तिगत अनुभव तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि वे समाज के सामने व्यापक प्रश्न उठाते हैं। वह पूछती है कि यदि एक महिला अपने चुने हुए परिधान में सहज महसूस करती है तो दूसरों को इसमें क्या समस्या होनी चाहिए। वह आज़ादी के सही अर्थ पर प्रकाश डालती है, जो न केवल अपनी पसंद को व्यक्त करने की स्वतंत्रता है, बल्कि दूसरों की पसंद का सम्मान करने की भी। वह इस बात पर जोर देती है कि लोगों को उनके कपड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि उनके विचारों और गुणों के आधार पर आंका जाना चाहिए। आयशा के सवालों से कॉलेज के छात्र शर्मिंदा होते हैं और उसके प्रति उनका नज़रिया बदलता है। कुछ छात्र उससे माफ़ी भी माँगते हैं। आयशा का यह कार्य न केवल उसके आत्मविश्वास को दर्शाता है बल्कि यह भी साबित करता है कि अज्ञानता और पूर्वाग्रह को समझ और सम्मान से ही हराया जा सकता है। कहानी इस बात पर ज़ोर देती है कि आयशा एक मेधावी छात्रा थी और हिजाब उसकी बौद्धिक क्षमता या पहचान के आड़े कभी नहीं आया।

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Ruchika Rai
Ruchika Rai 26 Feb, 2023 | 0 mins read

होली और हम

होली और हम

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rashi sharma
rashi sharma 03 Nov, 2022 | 0 mins read

सुर, साज और संगीत......................

बजता है तो विभोर कर देता है, आंसू झलकते है जब तो लगता है दिल छू लेता है, कौन कहता है मामूली है संगीत का हर साज़, बजता है तो लगता है सांस लेता है.

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Manisha Bhartia
Manisha Bhartia 17 Aug, 2022 | 1 min read

#my100 word story# प्रण

Independence day

#Radha patwari vrindawani

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Dakshal Kumar Vyas
Dakshal Kumar Vyas 12 Aug, 2022 | 0 mins read

अखंड भारत

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#Azadi ka Amrit Mahotsav #Indian #Independence day

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सहेली

सच्ची मित्रता किशोर वय के निश्छल लगाव में अधिक प्रभावी लगती है।

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Dakshal Kumar Vyas
Dakshal Kumar Vyas 06 Jul, 2022 | 0 mins read

क्यों

आज क्यों

#Strees #Youths #Life #Heath #Paperwiff

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Ruchika Rai
Ruchika Rai 06 Jun, 2022 | 0 mins read

बदलाव की बयार

बदलाव की बयार

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Dakshal Kumar Vyas
Dakshal Kumar Vyas 03 Jun, 2022 | 0 mins read

मध्यम वर्ग

It's article about middle class in society

#Indian #Middle class #Paperwiff

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Dakshal Kumar Vyas
Dakshal Kumar Vyas 10 May, 2022 | 1 min read

फर्क

Life of farmers and the rich people

#Climate #Paperwiff #Farmers #Culture #India

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✍️

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