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Sushma Tiwari
Sushma Tiwari 10 Aug, 2019 | 0 mins read

वो माँ है

माँ की सुंदरता की कोई सीमा होती है

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Sushma Tiwari
Sushma Tiwari 10 Aug, 2019 | 1 min read

मुझमें है तू

जगह अलग पर हालात एक है

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 10 Aug, 2019 | 1 min read

कर्म

गीता में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को 'कर्म' के विषय समझाते हुए यह कहते हैं कि प्रत्येक मनुष्य हर समय कोई न कोई काम करता ही है और कर्म ना करने से बेहतर है कि कुछ न कुछ करते ही रहो। उसी से शरीर निर्वाह भी संभव है। तब अर्जुन भगवान से पूछते हैं कि भगवान आप तो सर्वव्यापी परमेश्वर हैं आपके पास तो किसी भी चीज का अभाव नहीं है तब आप क्यों कर्म करते हैं? भगवान इस प्रश्न का एक बहुत ही प्यारा, बहुत ही प्रशंसनीय जवाब देते हैं अर्जुन मैं जो जो कार्य करता हूँ, मेरा अनुकरण पूरा संसार करता है अगर मैं कार्य करता हूं पूरा संसार मेरे मेरा अनुकरण करते हुए वैसा वैसा ही कार्य करते हैं अगर मैं कार्य करना बंद कर दूं या निष्क्रिय हो जाऊं तो यह संसार भी निष्क्रिय हो जाएगा और संसार का नाश हो जाए इसलिए मेरा कर्म करना जरूरी है।

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 10 Aug, 2019 | 1 min read

परसाई

हरिशंकर परसाई आज हरिशंकर परसाई जी की पुण्यतिथि पर उनको सादर नमन! हिंदी व्यंग्य की दुनिया में जब भी घुसा जायेगा, परसाई ही परसाई मिलेंगे। मैंने उनकी पहली रचना 'टेलीफोन' पढ़ी थी, जिसके बाद खुद मुझे व्यंग में काफी रूचि बढ़ गयी थी। उसके बाद मैंने उनके द्वारा लिखे गए कई व्यंग पढ़े। आज के साहित्य में वैसा व्यंग मिलना दूभर है, परसाई जी के व्यंग में खास बात ये थी कि वो तमाचा जिसे मारते थे, ताली भी वही बजाता था, बाद में पता चलता कि अरे! मेरी ही खिल्ली उड़ गई। उनके व्यंग्यात्मक निबंधों में सामाजिक बुराइयों पर कटाक्ष देखने को सहज ही मिल जाता है। परसाई जी हिंदी साहित्य जगत में व्यंग के लिए एक अमिट छाप हैं, उनके बिना व्यंग अधूरा है।

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 10 Aug, 2019 | 0 mins read

रक्षाबंधन

रक्षाबंधन एक त्यौहार जिसमे बहन अपने भाई को रक्षासूत्र बाँधती हैं, और भाई अपनी बहन को उसकी रक्षा का वचन देता है। हिन्दू धर्म का ये पवित्रतम त्यौहार हमें एक पवित्र रिश्ते में जोड़ता है। अतः न सिर्फ हिन्दू धर्म में बल्कि सभी धर्मों में यह त्यौहार मनाया जाना चाहिये,क्योकि भाई और बहन का प्यार किसी मजहब विशेष का मोहताज नही होता। इसीलिए ये रिश्ता पवित्रतम् माना जाता है। जिस तरह भाई अपनी बहन को उसकी सुरक्षा का वादा करते हैं, मैं सभी बहनों से आग्रह करता हूँ कि वो भी अपने भाई को उसकी रक्षा का वादा करें, ये वादा अपने भाई को नशे, कुसंगति, और कुमार्ग पर चलने रोकने का होना चाहिए। बहन अगर अपने भाई से बदले में ये वादा लें कि वो इन गलत रास्तो में नही चलेगा,तो इस तरह से बहन अपने भाई की ज़िंदगी बदल सकती हैं।

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 09 Aug, 2019 | 1 min read

ग़ज़ल

मछुआरा पानी से डर कर बैठेगा, अँधियारा मुझ में घर कर बैठेगा? मैं हवा, ठहरा, तो क्या रुक गया, अपने घर तूफ़ां भी आकर बैठेगा। छोटी मोटी पतवारों को क्या छेड़ें, ये हाँथ जहाँ बैठेगा जम कर बैठेगा। कुर्सियाँ बिकती हैं खरीद सकते हो, मग़र जो बैठेगा इज़ाज़त लेकर बैठेगा। ग़ज़ल लिखी जाती है ऐसे माहौल में, तू पढ़ने बैठेगा तो संभलकर बैठेगा।

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 09 Aug, 2019 | 1 min read

बच्चे बन जाएं

आओ कुछ पल बच्चे बन जाएँ, आओ कुछ पल सच्चे बन जाएं। न हो किसी से ईर्ष्या, न हो किसी से जलन, कुछ पल के लिए हम झगड़ें, फिर उसके ही दोस्त बन जाएं। आओ कुछ... दिल में हो एक ज़िद, पाने को पूरी दुनिया हो, खोने का न डर हो, अपनी चीजें हम खुद तोड़ें, और फिर खुद बनाएं। आओ कुछ पल... आँखों में हर पल , एक ख्वाब झलकता हो, मिल जाये तो खुश, नही तो हम रूठ जाएँ, कुछ पल के लिए हम रूठे, फिर हम खुश हो जाएं, आओ कुछ पल... छोटी छोटी खुशियाँ हो, छोटी-छोटी चीजें, इन छोटी चीजों में ही, हमारे सब सपने सच हो जाएं, इन छोटी छोटी खुशियां पा , हम भी खुश होने लग जाएँ। आओ कुछ पल... खेल खेल में हम, सारे काम कर जाएँ, इस तन में कुछ फुर्ती पाएं, सयानो को भी बच्चे बना पाए, हम भी अपना बचपना पाएं। हम भी अपना बचपना पाएं।। आओ कुछ पल.... अपने ख्वाबो में ही अपनी दुनिया हो, नित नए नए सपने सजाएँ, दिल में कितना भी दुःख हो, दो आंसुओ में हम सारा दर्द भूल जाएं। आओ कुछ पल बच्चे बन जाएं। आओ कुछ पल सच्चे बन जाएं।। ©aman_g_mishra

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 09 Aug, 2019 | 1 min read

मन

मन बहुत अधीर है, चंचल हुआ ये नीर है। मन में अमन नही, अमन में मन नही, कैसा ये संयोग है, या कहूँ वियोग है। मन से अमन का... मन को अमन चाहिए, अमन को मन चाहिए, ये कैसा बेजोड़ है, कैसा बेमिसाल है जो प्रेम है , जो नेम है, बिछड़ाव , मन से अमन का... मन मानता नही, अमन की सुनता नही, फिर भी, मन चाहता है अमन, पर अमन से दूर ही , खोया रहता है, जैसे इश्क़ हो गया हो, मन से अमन का... अमन के मन में , अमन नही, जैसे सागर के , तल में जल नही फिर भी अलग है, या एक हैं, अमन भी जानता नही, ये लगाव, मन से अमन का... ©aman_g_mishra

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 09 Aug, 2019 | 1 min read

स्वयं-सुधार

जूझ रहा हूँ, कुछ सूझ रहा हूँ, हर-पल एक पहेली बूझ रहा हूँ। अब हर पहेली का, हल निकाल डालूंगा, अब हार नही मानूंगा।। लड़ता रहा,झगड़ता रहा, खुद से,खुद को मिटाता रहा। अब हरेक गलती को,जड़ से मिटा डालूंगा, अब हार नही मानूंगा।। जमाने की सुनता रहा, खुद को ताने बुनता रहा। अब मैं खुद की सुनूंगा, और यही ठानूंगा, अब हार नही मानूंगा।। गलतियां पे गलतियां करता रहा, अपनी हार पर,खुद को हारता रहा। अब कुछ भी हो,मैं खुद को ही सुधारूँगा, अब हार नही मानूंगा।। अपने वजूद पर तरस आपने लगी थी , आईने के सामने शरम आने लगी थी। अपना वो चेहरा,अब खुद को नही दिखाऊंगा, अब हार नही मानूँगा।। पल -पल की कीमत पहचानूंगा, खुद की ज़ीनत ,अब बचाऊंगा। अब तक जो भी किया,सब भूल कर, एक नई जिंदगी मैं पाऊँगा।। अब हार नही मानूँगा। अब हार नही मानूँगा।। ©aman_g_mishra

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 09 Aug, 2019 | 1 min read

ग़ज़ल

तुम क्या जानो अँधेरे में साये कैसे दिखते हैं, वे लोग सरसैया जलाकर इबारत लिखते हैं। हाँ है दर्द मेरी हालत में बहुत, तुम भी रोओगे हम लोग तो पत्थरों पर अपना भाग लिखते हैं। हमारा हाल लिखके वक़्त ज़ाया न करो अमन' ये अमीर हैं साहेब ये धूप में कहाँ दिखते हैं। ©aman_g_mishra

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 09 Aug, 2019 | 1 min read

Ghazal

poetry

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 09 Aug, 2019 | 1 min read

ग़ज़ल

ग़ज़ल

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