आदि
23 May, 2022 | 1 min read
Vinita Tomar
22 May, 2022 | 1 min read
आखिर कौन हूं मैं!
खुद की अस्तित्व को परिभाषित करती एक कविता।
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Shubhangani Sharma
22 May, 2022 | 1 min read
वह दौर... बिजली...
एक समय बिजली की सिर्फ़ आवश्यकता रहती थी पर अब वह जीवन है। उसी समय की एक छोटी सी सैर...
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Neha yadav
21 May, 2022 | 0 mins read
सिर्फ तुमसे
सिर्फ तुमसे ही दिल्लगी,तुमसे ही खुशी , सब कुछ तुम. ये खयाल आता है जब जब्बाब में आशिक का प्यार उसके पास आता है । यह शायरी ऐसे हि प्यार ऐसे ही इजहार ऐसी ही चाहत से जुड़ी हुए है। धन्यवाद । नेहा यादव।
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आशिक़ी ऐसे ही उड़ान भरती है
Saket Ranjan Shukla
24 Jul, 2026 | 1 min read