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02 Aug, 2022 | 1 min read
rashi sharma
02 Aug, 2022 | 1 min read
rashi sharma
01 Aug, 2022 | 0 mins read
Narender Rana ( Niru )
01 Aug, 2022 | 1 min read
मैं मुस्कुराता हुं
मैं मुस्कुराता हुं ( Poetry/ shayari)
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डा.अंजु लता सिंह गहलौत( Anju Lata Singh gahlot)
31 Jul, 2022 | 1 min read
"बचपन में"(कविता)
बचपन में बालक सभी गमों से दूर भोलेपन और मस्त माहौल में समय बिताता है।
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rashi sharma
31 Jul, 2022 | 0 mins read
"दहलीज़ को इंतज़ार"
खामोश चीज़े भी बात करती है, हमसे पूछों कितने सवालात करती है, ऊबने नहीं देती किसी को कभी, ना जाने कैसी - कैसी बात करती है.
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Shivani (Paakhi)
30 Jul, 2022 | 1 min read
औरत
ये जवाब है उस हर सवाल का जो उन औरतों आँखों में आते हैं जिनकी आँखें देखती हैं पिंजरों से बाहर के आसमान और आज़ादी को... वो जानना चाहती हैं उनके हिस्से ये जो भी आया है उसका आखिर बंटवारा किसने किया था?....पढ़िएगा ?
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rashi sharma
30 Jul, 2022 | 1 min read
गुज़रते दिन...............
सुबह होती है, शाम होती है, ज़िन्दगी यूँ ही तमाम होती है.
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