rashi sharma
28 Jul, 2022 | 0 mins read
ढ़लता सूरज.................
छुप गया वो भी हमसे परेशान हो कर, मद्धम पड़ गई उसकी रोशनी हमसे मिलकर, ना जाने क्यों सारी कायनात हमसे खफा हो गई, दुआ भी लगती है हमसे नाराज़ हो गई.
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rashi sharma
27 Jul, 2022 | 0 mins read
जीने दो..................
हमने कब कहा कि हमें कोई चाहिए, किसी की नसीहत या फिर किसी की मदद चाहिए, रहने भी दो दिखावे कि ज़रूरत ही क्या है.
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rashi sharma
26 Jul, 2022 | 1 min read
पहली मुलाकात .....................
उससे मेरी और मेरी उससे पहली मुलाकात. वो एक शहर है जो ना जाने कितनों का है, मैं एक नया मुसाफिर हूँ उसका जो शायद अब मेरा भी घर है, वो रखेगा तो रह लेंगे नहीं तो कुछ यादें जोड़ वहाँ से भी चल देंगे.
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rashi sharma
25 Jul, 2022 | 0 mins read
संगीत..........
कोई कम जानता है, कोई ज़्यादा जानता है, लेकिन एक संगीत है, जो सबको पहचानता है.
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