rashi sharma
08 Sep, 2022 | 1 min read
rashi sharma
07 Sep, 2022 | 0 mins read
rashi sharma
02 Sep, 2022 | 1 min read
"मुस्कान"
जैसे ग़म की वजह तलाशते हो,मुझे भी तलाशों, कहीं खो ना जाऊँ मैं, मुझे पर भी ध्यान लगाओं.
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rashi sharma
01 Sep, 2022 | 0 mins read
जलसमाधि................
माना कि कुदरत की हर चीज़ बेहद सुन्दर है, ज़िंदा रहने के लिए इसकी बेहद ज़रूरत है, लेकिन क्या करें जब ये ही बिगड़ जाए, कितनी भी मिन्नतें कर लो, ये अपनी पर अड़ जाएं.
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rashi sharma
30 Aug, 2022 | 0 mins read
अप्रवासी..............
कौन रोक सकता है जाने वाले को, जब मन बना ही लिया है उसने समुद्र पार करने का, तो भला कोई कैसे रूक सकता है, देख के नम आँखों को.
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rashi sharma
29 Aug, 2022 | 0 mins read
वाबस्ता.................
हर कोई किसी ना किसी से ज़ड़ा हुआ है, चाहे - अनचाहे बंधा हुआ है, कोशिश कर लो कितना ही छुड़ाने की, बांधने वाले ने बड़ी तसल्ली से पकड़ रखा है.
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rashi sharma
28 Aug, 2022 | 0 mins read
वो और हम..............
उसका नाम बदल देता है, उसके आगे सब फिका लगता है, शांति के करीब वहीं तो ले जाता है, सुकून से वो राब्ता कराता है.
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rashi sharma
24 Aug, 2022 | 1 min read
मैं गुस्सा.................
खराब वक्त की घंटी हूँ मैं, तबाही की दस्तक हूँ मैं, हर शय है घर मेरा, भगाओं मुझे नहीं तो खा जाऊँगा मैं.
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