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Manu jain
Manu jain 26 Jun, 2020 | 1 min read

मामूली ख्याल

एक कविता मैं चाहूं जो ग़ज़ल हो जाएं ।।

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 24 Jun, 2020 | 1 min read

तूने मुझको है महकाया

दिल से पढ़ियेगा

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 14 Jun, 2020 | 1 min read

भारत विडम्बना

तुम दृढ नही ,तो कुछ नही, तुम आज हो,पर कल नही! अपने विचारों की सदृढता, खो गयी या थी नही !! सिंधु की लहरों में अब , सिंह सी गर्जना नही ! बात कह के जो अटल हो, क्या वो अब भारत नही!! बाण शैया पर था लेटा, शब्द सार्थकता सही! अपने ही वचनों पर अमर हो, क्या वो गंगा-सुत तुम नही!! दुनिया को सिखलाया इसी ने, ज्ञान-दीपक था यही ! क्षुद्र-पाखण्डी प्रभावित, क्या ये भारत था वही!! गंगा की लहरें भी न बदली, अब भी हिमालय खड़ा वहीं! तब क्यों कहता है ये भारत, अब स्वर्ण की चिड़िया नही!! क्या अब इस माटी में , वो वीर पैदा होते नही! कि भारत माँ की छाती में, अमृत सा अब पय नही!! फिर क्यों उसकी संतानों में , वो तेज दिखता ही नही! जो बता दे विश्व को, अब भी ये भारत है वही!! अब भी ये भारत है वही!! भारत माता की जय!! जय हिंद!! ©aman_g_mishra

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 14 Jun, 2020 | 1 min read

तुम ज़िंदा हो तो सबूत रखो

तुम ज़िंदा हो, तो सबूत रखो, यहां कुछ मुर्दे टहलते रहते हैं। बातों में आग से खेलते हैं जो, धूप लगते ही पिघलते रहते हैं। इनकी बातों में मैं नही आता, ऐसे लोग तो, मिलते रहते हैं। तुम सच्चाई को हिम्मत से कहो, कुछ लोग ज़ुबान सिलते रहते हैं। तुम अपनी क़द्र करना सीखो, लोग फ़न को कुचलते रहते हैं। तुम चराग़ जलाये रखा करो, रास्ते में सांप निकलते रहते हैं। अपनी बातों में वज़न रखो अमन, यहां सब फालतू ही बोलते रहते हैं। aman g mishra

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 13 Jun, 2020 | 1 min read

अग्नि-परीक्षा

कवि , संघर्ष को शब्दों में पिरो दे तो काव्य का निर्माण होता है।

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 13 Jun, 2020 | 1 min read

एक ग़ज़ल

एक बेहतर कवि उससे भी बेहतर इंसान होता है।

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 13 Jun, 2020 | 1 min read

अग्नि-परीक्षा

कवि , संघर्ष को शब्दों में पिरो दे तो काव्य का निर्माण होता है।

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Shah  طالب  अहमद
Shah طالب अहमद 13 Jun, 2020 | 1 min read

Letter 9

Poetry

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 13 Jun, 2020 | 1 min read

कुछ सवालात

कभी आईने में देखो सूरत अपनी, तुम खूबसूरत हर-बार लगते हो क्या।

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 13 Jun, 2020 | 1 min read

उसकी अदा भी कड़वी है।

हवा भी कड़वी है, दवा भी कड़वी है! मैं ठीक होऊ तो कैसे, उनकी अदा भी कड़वी है !! ©aman_g_mishra

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 13 Jun, 2020 | 1 min read

नज़र

मेरी नज़रें किसी की नज़र में हैं, लगता है मेरी कश्ती भँवर में है।

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 13 Jun, 2020 | 1 min read

सीता पुनः रावण की गिरफ्त में हैं...

जब हर सख़्स में रावण दिखता हो पुरुषोत्तम श्रीराम, धनुष उठायें कैसे।

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