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rashi sharma
rashi sharma 06 Sep, 2022 | 1 min read

मलाल...............

ना जीने देता है, ना मरने देता है, ऐ मलाल रोक देता है इंसान को, खुद में कैद कर लेता है.

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rashi sharma
rashi sharma 03 Sep, 2022 | 1 min read

मैं सीढी.............

हार - जीत से दूर में लोगों का साथ निभाता हूँ, मंज़िल दूर ही सही में हर प्रयास में ड़ट कर खड़ा रहता हूँ, मैं सीढी कितनों का सफर आसान करता हूँ.

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rashi sharma
rashi sharma 27 Aug, 2022 | 0 mins read

मैं सफलता ऐसी हूँ..................

मेरे आने पर घंमड़ ना कर, मेरे जाने पर पागल ना बन.

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Shubhangani Sharma
Shubhangani Sharma 22 Aug, 2022 | 1 min read

चीले देवता

बारिश में पकवान खाने वालों के लिए मज़ा और बनाने वालों के लिए सज़ा।।

#A Humourous tale

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rashi sharma
rashi sharma 12 Aug, 2022 | 1 min read

ऐ कहाँ आ गए हम..............

सब जानते है फिर भी सवाल करते है, क्यों है यहाँ ऐ भी पूछते है, पहचानी जगह भी अब, पहचान मे नहीं आती, क्यों इस कदर अनजान हो गए हम.

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rashi sharma
rashi sharma 07 Aug, 2022 | 1 min read

बचा लो मुझे...............

पुकारती है, कराहती है, ये आवाज़ भी लगाती है, सुनों इसे ध्यान से ये अपनी कहानी सुनाती है, परेशान इंसान ही नहीं ये भी है, सिमट रहा है इसका अस्तित्व क्या इस पर हमने ध्यान दिया कभी.

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rashi sharma
rashi sharma 06 Aug, 2022 | 1 min read

"मोह - माया"

अपना सपना मनी - मनी, मोह - माया में ज़िन्दगी घिरी.

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rashi sharma
rashi sharma 02 Aug, 2022 | 1 min read

मैं और वो............

काश झगड़ा भी बच्चों वाला होता, एक मुस्कान या टाॅफी पर सुलझ गया होता.

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rashi sharma
rashi sharma 01 Aug, 2022 | 0 mins read

"क्या फर्क पड़ता है"

हो ना हो हमें पता है, पूरा तो नहीं पर थोड़ा तो पता है.

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rashi sharma
rashi sharma 31 Jul, 2022 | 0 mins read

"दहलीज़ को इंतज़ार"

खामोश चीज़े भी बात करती है, हमसे पूछों कितने सवालात करती है, ऊबने नहीं देती किसी को कभी, ना जाने कैसी - कैसी बात करती है.

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rashi sharma
rashi sharma 30 Jul, 2022 | 1 min read

गुज़रते दिन...............

सुबह होती है, शाम होती है, ज़िन्दगी यूँ ही तमाम होती है.

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rashi sharma
rashi sharma 28 Jul, 2022 | 0 mins read

ढ़लता सूरज.................

छुप गया वो भी हमसे परेशान हो कर, मद्धम पड़ गई उसकी रोशनी हमसे मिलकर, ना जाने क्यों सारी कायनात हमसे खफा हो गई, दुआ भी लगती है हमसे नाराज़ हो गई.

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