प्रेरणादायक विचारों का संसार

अति प्रेरणादायक विचार

Originally published in hi
❤️ 0
💬 0
👁 9
Kumar Sandeep
Kumar Sandeep 17 Aug, 2026 | 1 min read
Calculating read time... 0 min left

41) विधाता की अदालत की वकालत बहुत न्यारी है, अतः किसी के हक का हनन करने से पूर्व, किसी का नुकसान पहुंचाने से पूर्व यह ख़्याल रखें कि पृथ्वीलोक पर जीवन की अवधि समाप्त होने के उपरांत देवलोक के लिए भी ग़मन करना है, तब विधाता को हमें हमारे द्वारा किए गए हर कर्म का उत्तर देना होगा। 

42)  अपने किरदार में ईमानदारी और उदारता का लिबास धारण करके हम धरा पर से अपने जीवन की अवधि पूर्ण करके देवलोक की यात्रा के लिए ग़मन कर जाएंगे फिर भी पृथ्वीलोक पर मौजूद लोगों के दिल में हमारी यात्रा अनंत काल चक चलती रहेगी। 

43)  लग्जरी क्लास कार (Jaguar, Hummer, BMW,

Audi, Ferrari इत्यादी) ना होने का ग़म मन में नहीं पालना चाहिए ज़रूरी नहीं कि यह ब्रांडेड कार जिनके पास है, वह अत्यधिक ख़ुशहाल हैं। यदाकदा बड़ी-बड़ी मँहगी गाड़ियों में सफ़र करने वाले लोग बड़े तनाव में दिखाई पड़ते हैं और यदाकदा साइकिल पर सवार सामान्य मजदूर के चेहरे की मुस्कुराहट देखकर लगता है कि इसके ऊपर ईश्वर आनंद व हर्ष की बारिश रोज़ कर 44) असफलता का तमाचा जब हमारे जीवन पर पड़ता है तभी हमारी मुलाकात सफलता से हो पाती है। 

45) चार-पाँच संतान होने के बावजूद माता-पिता को अपनी संतान नीरस और ऊबाऊ नहीं लगते हैं पर चार-पाँच संतान  को एक माता-पिता एक वक्त के बाद नीरस और ऊबाऊ लगने लगते हैं यह दुर्भाग्य की बात है, स्मरण रहे इतिहास की पुनरावृत्ति होती है। आज यदि आप अपने माता-पिता को यथोचित सम्मान वृद्धावस्था में नहीं देंगे तो कल आपकी संतान आपके लिए फूल से सजा हुआ बिस्तर आपको नहीं देगी, बल्कि इतना कष्ट देगी जिसकी कल्पना भी आप नहीं कर सकते हैं।


46) अहंकार का आगमन मन में होना शुभ संकेत नहीं है, बल्कि इस बात का संकेत है कि अब हमारा क्षय आरंभ हो चुका है, अतः तत्क्षण हमें अपने अपने मन से अहंकार की विदाई कर देनी चाहिए।


47) बेटी की विदाई के दृश्य को देखने के लिए विराट हृदय की आवश्यकता है। उस क्षण माँ की आँखों की नमी, पिता के हृदय की व्याकुलता अपने चरम पर होती है। अलगाव का वह गम परिवार में दुख का पहाड़ टूटने के मानिंद होता है।

48) बाल्यावस्था में एक पल के लिए भी माँ अपनी आँखों से ओझल होता अपनी संतान को नहीं देखना चाहती है। पर उस माँ को जब बेटे की पढ़ाई या कमाई के लिए शहर भेजना पड़ता है, तो माँ के हृदय में जो उधेड़बुन चल रहा होता है संतान की सलामती को लेकर उसकी व्याख्या शब्दों में किसी भी कीमत पर नहीं की जा सकती है49) बेटी की विदाई के वक्त माँ का ममत्व आँखों से आँसू बनकर निकलता है पर पिता का प्रेम पिता के हृदय में धड़कता रहता है। पर पिता बेटी से अलगाव का दर्द अपनी आँखों से बाहर नहीं निकालते हैं।

50) जीवन के झंझावात से परेशान होकर जीवन का अंत कर लेना बुद्धिमानी किसी भी कीमत पर नहीं कही जा सकती है। ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका समाधान संभव नहीं है, चाहे समस्याओं के प्रकार कोई भी हो।






0 likes

Support Kumar Sandeep

Please login to support the author.

Published By

Kumar Sandeep

Kumar_Sandeep

Comments

Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓

Please Login or Create a free account to comment.