51) पिता अपने पलकों पर पीड़ा के सागर का पानी रोककर रखते हैं, नहीं चाहते हैं मेरी आँखों का खारा पानी मेरी संतान के उत्साह, मनोबल को कम करें। क्योंकि पिता अपनी आँखों के सामने ही देखना चाहते हैं संतान की ज़िंदगी की बदलती अनमोल कहानी।52) जब शिक्षक और हमारे पैरेंट्स हमारी भूल पर, हमारे द्वारा की गई ग़लती पर हमें समझा रहे हो, तो उस वक्त हमें यह जस्टिफाई नहीं करना चाहिए कि मैं सही हूँ, आप मत समझाइए, आप ग़लत हैं मैं ही सही हूँ। बल्कि हमें उनके बताए मार्ग पर चलकर जीवन के मार्ग को बदलने का संकल्प लेना चाहिए उस क्षण। क्योंकि पेरैंट्स और गुरु के सिवा भला कौन चाहता है कि हमारा भला हो? हर रिश्ते में स्वार्थ का समावेश है, पर पैरेंट्स का व आदर्श शिक्षक का रिश्ता आज भी हमारे साथ निःस्वार्थ भाव से जुड़ा है।
53) ज्ञान पर जिस दिन से हम अपने मन में अहंकार का बीज अंकुरित कर लेते हैं, उस दिन से हमारा क्षय होना सुनिश्चित हो जाता है।
54) जब तक साँसें हैं शेष हमें करते रहना चाहिए कुछ विशेष, क्योंकि एक दिन है हम सबको यहाँ से जाना पर स्मरण रहे जीते जी है कुछ ऐसा करके जाना कि जाने के कई वर्ष बाद भी हमारा नाम धड़कते रहे कई लोगों के हृदय में।
55) हमारी हर छोटी ग़लतियों पर टोकने वाला, हमें समझाने वाला जब हमारी एक भी ग़लती पर कुछ भी कहना, समझाना बंद कर दे तो यह समझ जाना चाहिए हमें कि हमने अपने जीवन के सबसे विशेष रिश्तों में एक रिश्ते को अब खो दिया है। 56) वृद्धावस्था में हमारे द्वारा अपने बड़ों के किए गए अनादर का रिटर्न परम दुखदाई होता है।
57) प्रकृति का हरेक सूक्ष्म कण हमारे लिए शिक्षक के समान है।
58) हमारे हरेक सपने साकार हो इसलिए यह अतिआवश्यक है कि हम हरेक मुश्किल हो हँसकर सहते हुए संघर्षरत रहें।
59) आज दुख सहना है ताकि कल की तारीख कोई मजबूरी ना रहे।
60) आँखों में कुछ अलग करने का सपना सजाने वाले किसी भी पल आँखों से आँसू नहीं बहाते हैं।
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