21)हमें हर रोज़ किसी एक भी ऐसे कार्य को नहीं करना चाहिए जिससे हमारे माता-पिता का नाम समाज में धूमिल हो, बल्कि हर रोज़ हर कार्य ऐसा करना चाहिए जिससे हमारे माता-पिता के नाम-पहचान में चार चाँद लगे। अब ख़ुद से प्रश्न करें कि आप कौनसा कार्य कर रहे हैं, पहले वाला या दूसरे वाला। अगर पहले वाला कर रहे हैं तो शीघ्रातिशीघ्र स्थगित करें और दूसरे वाला कर रहे हैं इसका तात्पर्य है कि आप अपने माता-पिता की अच्छी संतान हैं22) माता-पिता और शिक्षक की समझाई गई अच्छी बातों पर न्यूटन का तृतीय गति नियम (प्रत्येक क्रिया के बराबर विपरीत प्रतिक्रिया) अप्लाई करने वाली संतान, अनेक संकट को भविष्य में सहती है।
23)माँ की बात व डाँट पिता की बात व डाँट, गुरु की बात व डाँट को शरबत की भाँति पीने वाले बच्चे भविष्य में पछताते नहीं बल्कि भविष्य में स्वयं पर गौरान्वित होते हैं।
24)डॉक्टर से मिलकर अपनी समस्याएं बताकर दवा दुकान से ले लेने भर से हम बीमारी से बाहर नहीं निकल सकते हैं। हम तब बीमारी से बाहर निकल सकते हैं जब हम डॉक्टर के परामर्श के अनुसार दवा का सेवन समय पर करेंगे। इसी तरह विद्यालय अथवा कोचिंग इंस्टीट्यूट में जाकर शिक्षक से पढ़ लेने भर से परीक्षा की तैयारी पूर्ण नहीं हो सकती है, जब तक कि घर पर समयानुसार सेल्फ स्टडी (स्वाध्याय) ना किया जाएगा। शिक्षक हर क्षण विद्यार्थियों के निकट बैठे ही नहीं रहेंगे कि पढ़ लो, नोट्स रिविजन कर लो, स्मार्टफोन अधिक मत चलाओ, आदि बातें। एक विद्यार्थी के रुप में हमें ही ज़िम्मेदार होना होगा तभी भविष्य स्वर्णिम होने की आशंका है।
25)एक विद्यार्थी के लिए सबसे बड़ा मोटिवेशन किसी मोटिवेशनल स्पीकर की लिखी गई कही गई पंक्तियां नहीं बल्कि उसके पापा की आँखों में पल रहे सपने और मेहनत करते हुए थककर चकनाचूर होकर, पाँव में पड़े छाले होते हैं। पापा के संघर्ष के इस दृश्य को महसूस करके भी आप मोटिवेट (प्रेरित) नहीं होते हैं तो दुनिया की कोई प्रेरणादायक बातें आपको प्रेरित नहीं कर सकती हैं। ना ही कोई मोटिवेशनल स्पीकर आपको मोटिवेट कर सकता है।
26)यदि हमारी नज़र में हमारे पापा के दुख का कोई मूल्य ही नहीं है तो सुबह देर तक हम सोए ही रहेंगे। हमारी नज़र में हमारी माँ की आँखों में पल रहे हमारे प्रति सपनों का कोई मूल्य नहीं तो हम समय बर्बाद करते ही रहेंगे। पर ऐसा करना भविष्य में हमें सफलता के शीर्ष पर नहीं बल्कि विफलता के गर्त में ले जाएगा अतः समय रहते सचेत हो जाना सही कदम रहेगा।
27)वर्तमान परिवेश में विद्यार्थियों के लिए सफलता:- पापा की दी गई गाड़ी की रफ़्तार एक सौ पार, हाथों में ब्रांडेड फोन, तन पर मँहगा वस्त्र। यही कुछेक विद्यार्थियों की सफलता है, वर्तमान में। पर विद्यार्थियों क्या यह आपकी असली सफलता है? पापा अपने हिस्से की मेहनत करके आपके ये शौक़ पूर्ण कर रहे हैं, अपने हिस्से की मेहनत आप भी तो कीजिए बुढ़ापे में आप उनके सहारे की छड़ी बन सकें इसलिए ख़ुद तो पहले अपने पाँवों पर खड़े होने के काबिल बनिए।
28)जिसकी अपनी बहन नहीं होती है, उस भाई की प्रार्थना को ईश्वर अवश्य स्वीकार करें कि हरेक भाई के हिस्से में एक बहन ज़रूर हो ताकि राखी के दिन भाई की कलाई सुनी ना रहे। और हर उस बहन की प्रार्थना को अवश्य स्वीकार करें ईश्वर जिसका अपना भाई नहीं है कि हरेक बहन के हिस्से में एक भाई अवश्य हो ताकि वह बहन राखी के दिन उदास ना रहे।
29)आज यदि हम संघर्ष कर रहे हैं, कुछ ख्वाहिश को हमें दफ़न करना पड़ रहा है, हम उतने धनवान नहीं जितने हमारे निकटवर्ती संबंधी/पड़ोसी हैं। तो इस बात का दुख नहीं मनाना है। बल्कि आपके जीवन में मौजूद यह तंगी आपके बेहतर कल की ओर संकेत करता है। हम प्रयत्न कर सबकुछ पा सकते हैं।
30)आज एक लक्ष्य बना हम बना लेंगे कि हमें उपरोक्त चैप्टर को अच्छे से कवर कर लेना है मतलब कर ही लेना है। और यह भी हर पल ख्याल रखना है कि कल की सुबह हमारी परीक्षा है तब, ऐसी कोई परीक्षा नहीं होगी जिस परीक्षा भवन में हमारे चेहरे पर मायूसी होगी बल्कि हर परीक्षा में परीक्षा भवन में हमारे चेहरे पर गर्व का वातावरण होगा।
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