11)वर्तमान का दुरुपयोग करना व घर के बड़ों की बातों का, भावनाओं का कद्र ना करना भविष्य में अनगिनत मुश्किल को आमंत्रित करने की तरह है।
12)अहंकार से सन्ने खून के रिश्तों से बेहतर है उनके साथ रिश्ता जिनसे हमारा रक्त संबंध तक नहीं है फिर भी उनकी नज़र में हमारे प्रति बेइंतहा फिक्र है।
13)जो अध्यापक केवल वेतन के लिए कार्य करते हैं वह अपने बैंक एकाउंट में ढेर सारी राशि जमा कर पाते हैं। पर जो शिक्षक केवल वेतन के लिए नहीं बल्कि प्यारे विद्यार्थियों के बीच पूर्ण समर्पण भाव के साथ शैक्षणिक सफ़र में कार्य करते हैं वह शिक्षक ज़िंदगी के सफ़र से विदा होकर देवलोक की यात्रा करते हैं फिर भी पृथ्वीलोक पर मौजूद विद्यार्थीगण के हृदय में और उनके अभिभावक के हृदय में जिंदा रहते हैं। इसलिए अध्यापक होने के नाते अपने कर्तव्य का निर्वहन पूर्ण ईमानदारी से हमें करना चाहिए क्योंकि इस पद जितना श्रेष्ठ पद कोई नहीं।
14)वैसे बच्चे मन से रोज़ पढ़ते हैं, जिन्हें हैं यह पता मेरे पापा रोज़ बहुत दुख सहते हैं। वैसे बच्चे रोज़ समय का करते हैं उपयोग, जिन्हें हैं यह पता मेरे पापा रोज़ जिम्मेदारी का बोझ उठाते हैं। वैसे बच्चे ही मन से रोज़ पढ़ते हैं बिना बहाने बनाएं, जिन्हें है यह पता मेरे पापा रोज़ तबीयत खराब होने पर भी काम करने जाते हैं।
15)हे विद्यार्थीगण! हम सभी अतीत को नहीं बदल सकते हैं, पर वर्तमान में कुछ बेहतर करके समय का सदुपयोग करके आने वाले भविष्य को बदल सकते हैं। जिस दिन परीक्षा परिणाम आएगा मार्कशीट हाथों में होगी उस दिन मार्कशीट पर नंबर ख़ुद से बदलने की क्षमता हमारे पास नहीं होगी पर आज अभी जो समय शेष है हमारे पास, उसमें हमारी यह क्षमता है कि मेहनत करके हम बेहतर सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
16)पिता के देहांत उपरांत घर के बड़े बेटे सहित छोटे बेटे में भी पिता के गुण समाहित हो जाते हैं। तब बड़ा बेटा व छोटा बेटा पिता की तरह अपनी तमाम ख्वाहिश को दफ़न करके परिवार के हर सदस्य को भरसक ख़ुश रखने का करता है प्रयास17)मान-सम्मान, प्रेम, अपनत्व जबर्दस्ती प्राप्त नहीं किया जा सकता है। इन चीजों का अभाव यदि दूसरों की नज़र में हमारे प्रति यदि है इसका तात्पर्य है कि हम उसकी नज़र में महत्वपूर्ण नहीं हैं। अतः इस बात से बिना निराश हुए अपने कार्य के प्रति ध्यान देना चाहिए, हमारा सत्कर्म हमें वर्तमान में ना सही पर भविष्य में किसी न किसी से अवश्य ढ़ेर सारा स्नेह, मान-सम्मान प्राप्त करने में मदद करेगा।
18)हमारे अभिभावक हमारी पढ़ाई में धन लगा रहे हैं, हमें पढ़ाई में अपना तन-मन लगाना है। तन-मन आज सही ढंग से यदि हम नहीं लगाएंगे तो कल हम धन, यश नहीं कमा पाएंगे। इसलिए हमें रोज़ मन से पढ़िना चाहिए अभिभावक की मेहनत व्यर्थ नहीं सिद्ध हो इसका भरसक ख़्याल रखना चाहिए।
19)स्वास्थ्य अनुकूल हो अथवा प्रतिकूल, चेहरे पर एक अनमोल मुस्कान और ऊर्जा के साथ विद्यार्थियों के बीच एक शिक्षक को अपनी ज़िम्मेदारी का निर्वहन करना ही पड़ता है। क्योंकि शिक्षक यदि शारीरिक स्वास्थ्य की अकुशलता से विद्यार्थियों के बीच उदास रहेंगे अथवा जीवन के झंझावातों से दुखी रहेंगे तो विद्यार्थी को किस प्रकार प्रेरित करेंगे। इसलिए कभी-कभी ज़िम्मेदारी हर ग़म को भूला देती है।
20)अति स्नेह, समर्पण का भाव आप दूसरों पर लुटाएंगे तो वर्तमान परिवेश कुछ ऐसा है कि आपको उतना ही उस शख्स से दुर्व्यवहार सहना पड़ेगा। जहाँ भावनाओं की कद्र ना हो वहाँ किसी भी रिश्ते में विराम देना सर्वथा उचित है।
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