रश्मिरथी : समीक्षा
दो न्याय अगर तो आधा दो , पर इसमें भी यदि बाधा हो तो , दे दो केवल पाँच ग्राम , रख्यो अपनी धरती तमाम ( तृतीय सर्ग - भाग -२ रश्मिरथी - कृष्ण चेतावनी ) हर सर्ग आपको आपके असल जीवन के मूल्य को समझाने का अचूक प्रयास करेगा और शायद सफ़ल भी हो जाये । और यक़ीन मानिए अगर आपने अभी तक यह महाकाव्य नहीं पढा तो आप हिंदी साहित्य के काव्य रस का अमृत नहीं चखा। ~ जहाज़ी संदेश ?
हम लड़के हैं !
मन में वेदनाएं नहीं हो सकती, क्योंकि उसमें स्त्रियों का हक़ है, मन की व्यथा नहीं हो सकती, क्योंकि वो भी औरतों के हिस्से में आता है,
##Men
पहले, बच्चों को ये सिखाइए
प्रथमतः बच्चों को क्या सिखलाया जाना चाहिए उसका उत्तर इस कविता में।
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