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Aman G Mishra
Aman G Mishra 25 Aug, 2019 | 1 min read
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Aman G Mishra 25 Aug, 2019 | 1 min read

कलाकार

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 25 Aug, 2019 | 1 min read
Aman G Mishra
Aman G Mishra 25 Aug, 2019 | 1 min read
Aman G Mishra
Aman G Mishra 24 Aug, 2019 | 1 min read

कृष्ण

ऋषियों ने यह कहा कि अन्यान्य अवतार उस भगवान के अंश और फलस्वरूप हैं लेकिन श्रीकृष्ण तो स्वयं भगवान हैं। (श्रीमद्भागवत महापुराण) वे एक ही स्वरूप में अभूतपूर्व संन्यासी और अद्भुत गृहस्थ हैं, उनमे अत्यधिक अद्भुत रजोगुण व शक्ति थी, साथ ही वे त्याग की पराकाष्ठा थे। गीता के प्रचारक श्रीभगवान अपने उपदेशों की साकार मूर्ति थे, वेदों की ऋचाएं उनका ही गायन करती हैं, अनासक्ति के उज्ज्वल उदाहरण हैं श्रीभगवान।उन्होंने कभी सिंहासन नही अपनाया, न ही उसकी चिंता की। जिनके आने से राजा और चक्रवर्ती सम्राट अपने मुकुट उनके चरणों मे रख देते थे, जिनको प्रथम पूज्य बनाकर युधिष्ठिर जैसे राजा अपने को धन्य समझते थे, उन श्रीभगवान ने सदैव राजा उग्रसेन के प्रतिनिधि के रूप में एक छोटी से नगरी में अनासक्त कर्म किया। उन्होंने बाल्यकाल में जिस सरल भाव से महान परमहंस गोपियों के साथ क्रीड़ा की, वही सरलता कंस के वध, महाभारत के युद्ध और यदुवंश के विनाश तक बनी रही। इतनी सरलता और मधुरता कि दो सेनाओं के बीच वह मुस्कराते हुए अर्जुन को विश्व का महानतम गूढ़तम दार्शनिक ज्ञान देते हैं जो आज भी पढ़ा जा रहा है लेकिन लोग तृप्त नहीं हो पा रहे। जो किया पूरे मन से, गोपियों के साथ सर्वश्रेष्ठ प्रेमी, नन्द बाबा और यशोदा माँ के सर्वश्रेष्ठ पुत्र ऐसे कि सब उनके जैसा पुत्र चाहते हैं, रुक्मिणी के पति के रूप में आदर्श पति, आदर्श योद्धा, आदर्श दार्शनिक, आदर्श रणनीतिकार, आदर्श राजनेता, और न जाने क्या क्या। विश्व के इतिहास में इतनी अनासक्ति और पूर्णता के साथ जीवन किसी ने आज तक नहीं जिया। साकार निराकार, कर्म सन्यास, यज्ञ दान तप और न जाने ऐसे कितने विवादों को अपनी सहज और प्रामाणिक तर्कसंगत वाणी से समाप्त कर दिए और बोले कि आत्मशुद्धि की तरफ बढ़ो। कर्म का एकमात्र उद्देश्य आत्मशुद्धि है।गोपियों के साथ उनके विशुध्द प्रेम को केवल एक आजन्म पवित्र नित्य शुद्ध शुकदेव गोस्वामी जैसा पूर्ण ब्रह्मचारी और पवित्र स्वभाव वाला प्रेमरूपी मदिरा में डूबा भक्त ही समझ सकता है। जिसने प्रेम में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया हो केवल वह ही मेरे श्रीभगवान मधुराधिपते को समझ सकता है। अहैतुकी भक्ति, निष्काम प्रेम, निरपेक्ष कर्तव्य निष्ठा का आदर्श धर्म के इतिहास में एक नया अध्याय है जो प्रथम बार सर्वश्रेष्ठ अवतार श्रीभगवान कृष्ण के मुख से निकला, जिनके कारण धर्म से भय और प्रलोभन हमेशा के लिए समाप्त हो गए। प्रेम केवल प्रेम के लिए, कर्तव्य कर्तव्य के लिए, काम काम के लिए। यह श्रीभगवान के मौलिक आविष्कार हैं जिन्हें उनसे पहले वेदों ने भी नहीं गाया। जिसके हृदय में अभी भी धन, स्त्री या पुरुष और यश के बुलबुले उठते रहते हैं, वह तो गोपियों और श्रीभगवान के प्रेम को समझने का साहस भी न करे। वह प्रेम तो ऐसा है कि उस समय संसार का कोई स्मरण नही रहता, समस्त प्राणियों में केवल श्रीभगवान दिखते हैं, आत्मा केवल श्रीकृष्ण से भर जाती है।

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 24 Aug, 2019 | 1 min read

गीत :कन्हैया

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 24 Aug, 2019 | 0 mins read

जन्माष्टमी

वेदों और उपनिषदों की व्याख्या करना बड़ा मुश्किल है, और संसारी जीवों को तो उसका अर्थ भी नहीं उतरता। इसलिए वेद जिनकी सांसें हैं, उन्ही श्रीभगवान ने आविर्भूत होकर गीता कर प्रचारक के रूप में श्रुति का अर्थ समझाया, और आश्चर्य यह कि इसे उपनिषदों और वेदों का निचोड़ माना गया। यहां आदि शंकराचार्य को अद्वैत मर दिखता है तो श्रीरामानुजाचार्य को विशिष्ट अद्वैत तो श्रीमध्व आचार्य को द्वैत दिखता है। सभी मत और सम्प्रदाय यहां आकर अपनी पूर्णता को प्राप्त हो जाते हैं। श्रीभगवान जब कहते हैं कि तुम हर मार्ग से मेरी ही आराधना करते हो, तो मन से सभी संशय और भय समाप्त हो जाते हैं। श्रीभगवान कहते हैं कि यह सारा जगत मुझमे वैसे ही गूंथा है जैसे धागे में मणि रहती है, क्योंकि मुझसे अलग तो कुछ है ही नहीं, तो सारी संकीर्णता और भेदभाव की दीवार गिर जाती है। गीता के वाक्य, श्रीकृष्ण की वज्र के समान गंभीर और महती वानीसब के बंधन तोड़ देती है और सभी को परम् पद का अधिकारी बना देती है। पलायन तो उनके शब्दकोश में नहीं था। कर्मयोगियों में सर्वश्रेष्ठ भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं अपने उपदेशों को जिया, और कहा कि कर्म किए बिना कोई नहीं रह सकता, कर्म करो लेकिन उसका विज्ञान समझो, कर्म जम के करो लेकिन फल की चिंता न करो, उलझ मत जाओ, कर्म का एकमात्र उद्देश्य है आत्मशुद्धि, इसलिए चिंता न करो, श्रीभगवान की शरण मे आ जाओ और वह तुम्हे सभी पापों से मुक्त कर देंगे। जिन्हें राजसूय यज्ञ में मेहमानों के जूते साफ करने में भी आनंद आता है, और अपने भक्त का रथ हांकने में भी, जिन्हें मिट्टी खाने में मजा आता गई और गरीब सुदामा के सूखे चावल भी, ऐसे महानतम श्रेष्ठतम प्रियतम अद्भुत आश्चर्य और विरोधाभास से भरे हुए साकार और निराकार से परे श्रीकृष्ण ही मेरी गति हों, मेरे आश्रय हो, और मैं अनन्तकाल तक उनका दास रहूं। जहां जहां जाऊं करूं तेरी सेवा तुम सम ठाकुर और न देवा।।

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 24 Aug, 2019 | 1 min read

ठाकुर जी

ठाकुर जी

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Aman G Mishra
Aman G Mishra 24 Aug, 2019 | 1 min read

भगवान् श्री कृष्ण

जुगलकिशोर ठाकुर जी महाराज

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