सप्तम कालरात्रि
नवरात्रि का सातवां दिन, मां कालरात्रि का ध्यान
अंधेरा....
जहां रोशनी की कमी हो या रोशनी न हो, वहीं अंधेरा होता है, अंधेरे से मुक्ति के लिए रोशनी बटोरनी है, एक चिंगारी जलानी है केवल.... फिर उसे समूल नष्ट होने से कोई नहीं रोक सकता। हां, जैसा अंधेरा वैसी ही रोशनी लानी होगी, अज्ञान का अंधेरा ज्ञान से खत्म होगा, भ्रष्टाचार का अंधेरा ईमानदारी से, निरक्षरता का साक्षरता से, आलस का अंधेरा कर्म करने से और झूठ का सिंहासन डोलेगा सत्य से ही।
मन का भय, प्रेम और समर्पण से व जीवन की दुश्वारियां तप से ही दूर होंगी, इसलिए अंधेरे को केवल पहचानना भर है, फिर पहली चिंगारी जलाने का प्रयास काफी है। याद रखें एक छोटी चिंगारी जैसी शुरूआत अंधेरे का अस्तित्व मिटाने में सक्षम है।
मां कालरात्रि तरह तरह के अंधेरों से लड़ने की शक्ति देती हैं। बस आपको मां के चरणों में समर्पित होना है।
"या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।"
सप्तम कालरात्रि ...
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता,
लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
आज सहस्रार चक्र पर ध्यान लगाकर मां कालरात्रि की ऊर्जा को महसूस किया जा सकता है।
*ध्यान विधि:
कुछ पल शांत होकर बैठें और आंखें बंद कर लें। सहज श्वास लेते हुए सहस्रार चक्र पर ध्यान केंद्रित करें। भाव करें कि मां कालरात्रि की दिव्य ऊर्जा आपके भीतर प्रकाश बनकर उतर रही है और मन के भय, संशय व अज्ञान के अंधकार को दूर कर रही है। मन ही मन मां से प्रार्थना करें, *हे मां! मुझे अपने भीतर के अंधकार को पहचानने और उसे मिटाने के लिए ज्ञान, साहस और शक्ति प्रदान करें।* कुछ पल इस भाव में ठहरें और मां के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें।
जय मां 🪷 🙏
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