तृतीयम चंद्रघंटा
नवरात्र का तीसरा दिन, मां चंद्रघंटा का ध्यान
भय कितना बड़ा दानव है, ये बात वही व्यक्ति जानता है, जिसके मन में ये ठहर जाता है। भय किसी भी चीज़ का हो सकता है, वही बात जो आपको डराती है, वह किसी और के लिए छोटी हो सकती हैं, लेकिन आपके पूरे व्यक्तित्व को लील जाती है। भय चेतन से लेकर अवचेतन तक आपके मस्तिष्क में कहीं भी घर बना लेता है, और बार बार आपको डराता है, उससे दूर भागने के बजाय ठहरकर उसको देखा जाना जरूरी है, और फिर आत्म ज्ञान का सहारे आगे बढ़ना ही मुक्ति का एकमात्र विकल्प है।
भय को दूर ज्ञान से ही किया जा सकता है, ज्ञान की रोशनी में हम चेतन मन के भय से मुक्त हो जाते हैं तो प्रेम और परमात्मा के प्रति समर्पण अवचेतन मन के डरों से मुक्त होने में मदद करता है, इस ठहराव को पानें के लिए ध्यान की शरण में जाना पड़ता है।
तृतीयम् चंद्रघंटा ....
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।
आज मणिपुर चक्र पर ध्यान लगाकर मां चंद्रघंटा की ऊर्जा को महसूस किया जा सकता है।
जय मां 🙏
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