पंचम स्कंदमाता
नवरात्र का पांचवां दिन, मां स्कंदमाता का ध्यान
मां...
एक नाज़ुक-सी, बात-बात में डर जाने वाली लड़की भी, जब मां बनकर संतान का पालन-पोषण करती है, तो संतान के लिए अप्रत्याशित रूप से प्रस्तुत हो जाती है। वो कुछ भी कर सकती है, संतान की सुरक्षा के लिए। गोदी में बच्चा लेकर वो बड़े से बड़ा पहाड़ लांघ सकती है। मां अपना सर्वस्व संतान पर लुटा देती है। और ये केवल मनुष्य रूप में ही मां नहीं करती, हर जीव रूप में मां ऐसी होती है। उसकी ममता उसके चेहरे पर तेज़ बनकर चमकती है। ममता की ताकत अद्भुत होती है।
हमारी मां हमें जीवन का उपहार देती है, प्रकृति मां हमें पोषण देती है, धरती मां हमें आश्रय देती है। दुर्गा मां इन सभी मांओं में मातृ शक्ति के रूप में विद्यमान हैं। इसलिए मांओं के प्रति कृतज्ञता जरूरी है।
जगत जननी का पांचवां रूप स्कंदमाता मातृत्व की अभिव्यक्ति है।
पंचम स्कंदमाता...
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी...।।
आज विशुद्धि चक्र पर ध्यान लगाकर स्कंदमाता की ऊर्जा को महसूस किया जा सकता है।
विशुद्धि चक्र ध्यान
आराम से बैठकर आँखें बंद करें और अपनी साँसों पर ध्यान ले आएँ। साँस को सहज रूप से आते-जाते महसूस करें और कुछ क्षण मन को शांत होने दें।
अब गले के मध्य विशुद्धि चक्र पर ध्यान केंद्रित करें। कल्पना करें कि वहाँ नीले रंग का प्रकाश फैल रहा है, जो आपको अपने भावों को सहजता और प्रेम से व्यक्त करने की प्रेरणा दे रहा है।
मन ही मन अनुभव करें कि आपके शब्दों में प्रेम, वाणी में मधुरता और भावों में सच्चाई है। माँ स्कंदमाता से प्रार्थना करें कि वे आपको प्रेमपूर्वक अपनी बात कहने और दूसरों के भावों को समझने की शक्ति दें।
जय माँ 🪷🙏
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