पहली मुलाकात .....................
उससे मेरी और मेरी उससे पहली मुलाकात. वो एक शहर है जो ना जाने कितनों का है, मैं एक नया मुसाफिर हूँ उसका जो शायद अब मेरा भी घर है, वो रखेगा तो रह लेंगे नहीं तो कुछ यादें जोड़ वहाँ से भी चल देंगे.
संगीत..........
कोई कम जानता है, कोई ज़्यादा जानता है, लेकिन एक संगीत है, जो सबको पहचानता है.
घर...........
जज़्बात भी है, एहसास भी है, हर कोना मेरे लिए खास भी है, जब भी लौटते है घर वो ऐसे पास बुलाता है, सूरज छुप जाता है तब तक, लेकिन घर हमें चारों ओर से झांकता है.
इसके बाद............
आज और अभी है, ज़िन्दगी इसी में तो सिमटी है, जो भी हो बस खुश रहो, जिसने दी है उसे शुक्रिया कहो.
कब तक.............
इतना ना आज़माओं के हम थक जाए, कोशिश भी थक हार कर बैठ जाए, ए खुदा कहीं बहुत अच्छे के इंतजार में, ऐसा ना हो कि असफलता के घाव से, सफलता का एहसास ही खत्म हो जाए.
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