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#picture prompt -9
होली के रंग बिखरे ,महक उठा हर छोर अद्भुत मेल मिलाप से, खुशी मिली घनघोर।
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by rekhajain
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03 Mar, 2026
#Topic contest अंधेरा
अंधेरा दूर जब होगा मिलेंगे प्यार के दो पल। तुम्हारे बिन यहां मेरा,हुआ है ये जिया बेकल। डॉ रेखा जैन दिल्ली
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13 Mar, 2026
#picture prompt -11
एक खत लिखा मैंने वफादारी के पते पर डाकिया ही चल बसा शहर ढूंढ़ते ढूंढ़ते* किंतु पता नहीं मिला।
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by rekhajain
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17 Mar, 2026
#Picture prompt -12
#pictureprompt-12 किनारे पर बैठे सोच में डूबा मन, डूबो देते इस असीम सागर में तन। दूर फैला नीला सागर,लहरों का शोर रेत पर नंगें पांव, ठंडी हवा में बीता बचपन। डॉ रेखा जैन दिल्ली में स्वरचित व मौलिक रचना
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24 Mar, 2026
#picture prompt -13
सप्तरंगो से सजी दिखती है सुबह की बेला। विविधता में एकता का लगता है जब मेला। लगे हैं सब जब जीवन का परचम लहराने। तब तत्पर रहता इन्द्रधनुष के रंगों का रेला। डॉ रेखा जैन दिल्ली स्वरचित व मौलिक रचना
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31 Mar, 2026
#स्थिर
चक्की के दो पाटों में से एक स्थिर और दूसरा घूमता रहे...तभी अनाज पिसता है... इसी प्रकार यदि हमारा मन स्थिर... और शरीर घूमता रहे... तभी सफल व्यक्तित्व संभव है। डॉ रेखा जैन दिल्ली
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03 Apr, 2026
#Picture prompt -14
दिखती युद्ध विभीषिका,जग में फैला रोष। जन जन में हलचल मची,खाली है सब कोष। खाली है सब कोष, देख क्रूरता निशानी । मिलकर करते काम,रोके युद्ध शैतानी । डॉ रेखा जैन दिल्ली स्वरचित व मौलिक
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07 Apr, 2026
#picture prompt -15
किसान ने बोयी श्रेष्ठ बीजों की नसल। बाढ़ ने चौपट कर दी हलधर फसल। बहुत सी ज़रुरतें पूरी करनी थी इस बार। सारे सपनों को एक झटके ने दिया मसल। डॉ रेखा जैन दिल्ली स्वरचित व मौलिक रचना
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14 Apr, 2026
#समर्पण
खुद को मिटाकर रखें रिश्तों की रखवाली। त्याग,समर्पण से आती रिश्तों में खुशहाली। रिश्तों के उपवन में खिलते हैं फूलऔर डाली। प्यार समर्पण की खाद से बची रहे हरियाली। डॉ रेखा जैन दिल्ली
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by rekhajain
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24 Apr, 2026
#Topic समर्पण
समर्पण प्रेम में थी निष्ठा तभी बड़ी प्रतिष्ठा हाथ पकड़ कर तिष्ठा समर्पण से बढ़ रही घनिष्ठा तभी बढ़ा प्रगाढ़ प्रेम संबंध कुछ तो करो ऐसा प्रबंध अर्पण को हूं मैं कटिबद्ध समर्पण करने में प्रतिबद्ध करता रहा अनुबंध प्रगाढ़ बनाने को संबंध तभी मिले मुझे आत्मिक आनंद। और जी सकूं मैं सानंद डॉ रेखा जैन दिल्ली
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by rekhajain
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24 Apr, 2026
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