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बचपन की महिमा
बच्चों की महिमा का गान।
बचपन होता बड़ा ही महान।
ऊंच नीच का भेद ना जानें-
भव्य क्रीड़ा का करें गुणगान।
कितना सुरभित बचपन था।
चंचल भावों का प्रचलन था।
छल कपट से रहते कोसों दूर-
सपनों का उन्मुक्त गगन था।
Paperwiff
by rekhajain