गुस्से का कहर..................
हिस्सा है इंसान का, महसूस होता है जज़्बात सा, ड़रते है इससे पर कुछ कर नहीं पाते, भागना चाहते है इससे पर भाग नहीं पाते.
मेरी दुनिया.............
जितने लोग उतने ही ख्वाब होते है, एक ही दुनिया में अनगिनत संसार होते है.
इस दफा हम.................
खुद पर भरोसा करना आ गया, हमें गुमराह करने वालो, हमें रास्ता ढूढ़ना आ गया.
Who was the real culprit?
The Protagonist is caught up in a dilemma. Either he can choose to do what he has been taught is right Or he can help his friend out of a tricky situation.
#shortstory #writing #dilemma #decision
अंतहीन नसीहतें..................
दिक्कत नहीं है सलाह लेने में, ना सुनने में ना खामोश रहने में, हर बार एक ही बात कानों में चुभने लगती है, फिर इंसानों को नसीहतों से खिज लगने लगती है.
समाज अनूठा आइना.............
कहते वाले बहुत है, मगर मानता कोई नहीं, धस गए है खुद में हम, मगर समझता यहाँ कोई नहीं.
रात तू इतनी...................
कभी तो तू भी सोया कर, छुप जाती है जब सूरज के पीछे, तब खुद की भी आवाज़ सुन लिया कर.
ज़रूरत है खुद की......................
खुद के साथ दोस्ती कर लो, फिर किसी और की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी, भटकते रहोगे साथी की तलाश में, अंत में खुद से ही बातें होगी.
ज़िन्दगी.................
उलझनों से जोड़ती है, आज़ादी कहती तो है, मगर कैद मेंं रहना पसंद करती है.
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