Saket Ranjan Shukla
saketranjanshukla
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ताक़त-ए-अल्फाज़ ⊻ ??????|??????|????? स्याहीकार|ᴘᴜʙʟɪsʜᴇᴅ ᴄᴏ-ᴀᴜᴛʜᴏʀ ⊻ रंग छोड़ती स्याही का सहारा लेता हूँ, अनकहे जज़्बात कह देता हूँ! ?@saketrshukla20 ?@my_pen_my_strength
मोहब्बत की बदनामी
मोहब्बत को पता नहीं क्या क्या ग़लत नाम दे दिया जाता है जब किसी एक में निभाने के हिम्मत की नहीं होती
स्कूल की मीठी मीठी यादें
यादें कभी कभी इतनी अच्छी होती हैं कि उनमें डूब जाने के बाद वक़्त का अंदाजा ही नहीं रहता ऐसी ही कुछ यादें होती हैं स्कूल के दिनों की, जो की हमारे पूरे ज़िन्दगी का सबसे खूबसूरत वक़्त होता है...
बीच डगर का सफ़र
कभी कभी ऐसा लगता है ज़िंदगी जी तो रहे हैं हम मगर जीने को कुछ है ही भी ना दुःख है ना सुख है, ना कोई हमसफ़र है, ना किसी की गुंजाइश है.... मतलब सफ़र बिल्कुल उबाऊ सी लगने लगती है
Love in eyes
आंखें बहुत कुछ कह जाती हैं मगर फिर भी जुबां से कुछ सुन लेने की उम्मीद लगी रहती है
नींद का इंतजार
मैं रात रात भर सोने की कोशिश करता हूँ मगर ये कमबखत नींद आती नहीं वक़्त पे कभी।