नारी प्रकृति का बनाया अनमोल रचना

भगवान का बनाया सबसे सुंदर रचना कुछ है तो वो नारी है।नारी कोमल है कमजोर नहीं।

Resmi Sharma (Nikki )
07 Mar, 2021 • 1 min read min read • hi
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नारी प्रकृति का बनाया अनमोल रचना

Photo by Phil Hearing on Unsplash


प्रकृति का बनाया एक सुकोमल शीतल स्पर्श शक्ति का अपार भंडार के रूप में एक सुंदर रचना है नारी। नारी आज समाज के हर क्षेत्र में काम कर रही है आज वह किसी का मोहताज नहीं है। फिर भी घर समाज में उन्हें समझौता करना ही पड़ता है दोहरी जिम्मेदारी में घिरी कई बार असमर्थता जताते हुए भी विभिन्न परिस्थितियों में अपने आपको ढाल लेती है।समय बदला सोच बदली है आज नारी सशक्तिकरण मैं अपने आपको साबित कर खड़ा कर लिया है।


नारी को भी पूरी तरह से समानता का अधिकार शिक्षा, संस्कृति, धार्मिक स्वतंत्रता,पुरुषों के समान अधिकार मिल चुके हैं। इसका उल्लेख संविधान में भी है शिक्षा, स्वास्थ्य,रोजगार, शोषण पर नियंत्रण और शोषण पर आवाज उठाना भी सिख गयी है।हर जगह नारी सशक्त हो रही है खुलकर आवाज उठाने में लगी है। संविधान में भी देखे तो पुरुषों की तरह नारी को भी समान अधिकार दिए गए हैं। जहां पहले नारी अपनी दुर्दशा पर रोने के अलावा कुछ नहीं कर सकती थी आज पूरी तरह आवाज उठाने और अपना हक जताने से पीछे नहीं हैं।आज हर मुकाम पर अपने आप को साबित कर चुकी है।

भारतीय संस्कृति में भी नारी को बहुत ही सम्मान और महत्व दिया गया है । धरती पर नारी के अनेक रूप हैं। नारी को दुर्गा , काली, चंडी एवं सरस्वती के रूप में मानने वाले लोगों की मानसिकता कहाँ लुप्त हो गई है समझ नहीं आ रहा। नारी की स्थिति पहले की तुलना में काफी हद तक सुधार हुआ है । नारी शिक्षा को बढ़ावा मिलने से प्रगति पथ पर अग्रसर होती रही है। राजनीति हो या व्यवसाय हर जगह नारी की भागीदारी है । नारी के बिना इस संसार में कुछ भी नहीं है । इसके बिना, यह सृष्टि अधूरी है।

भारतीय समाज को हमेशा पुरुष प्रधान माना गया । लेकीन अब 21वीं सदी में पूरी तरह से बदलाव आया है । आज नारी पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं, फिर भी जो सम्मान, जो इज्जत नारियों को मिलनी चाहिए वह मिल नहीं रही है। जिस तरह के अमानवीय व्यवहारों से वह गुजरती है उसका अंदाजा भी शायद लगाना मुश्किल है। एक तरफ हम उन्हें आगे बढ़ाने की बात करते हैं और दूसरी तरफ अभद्रता की हद पार करते हैं।आजकल महिलाओं,छोटी-छोटी बच्चियों के साथ अभद्रता की सारी सीमाएं टूट गई है।आज एक भी दिन ऐसा नहीं जाता जब हम बलात्कार जैसी अभद्रता की घटना नहीं सुनते हैं। 4 महीने की बच्ची से लेकर महिलाएं तक सुरक्षित नहीं है।आज फिर इक्कीसवीं सदी में पहुँचकर भी समाज की सोच नहीं बदल रही।


अपने ही घर में वह सुरक्षित नहीं होती घरों में भी शोषित हो रही है।समाज किस ओर जा रहा एक बार चिंतन करके देखें ।कानून नहीं हमें सोच बदलनी होगी,लड़कों को सिखाना होगा सम्मान करना नारी का। समाज के सभी लोगों और कानून-व्यवस्था से आगे अपेक्षा होगी लाचारी,बेबसी और तड़प से नारी बाहर निकल सके एक समय ऐसा लाएंं.. जहां बच्चियां, औरतें बेखौफ होकर घूमे।आशा है एक सम्मान ,बेखौफ, आजादी और बेवाकपन से जीने का अधिकार जरूर मिलेगा। खुद को बदलें अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें भारतीय संस्कृति में नारी के महत्व और सम्मान को बताएं समझाएं ।मां,बहन और बेटीयों के पवित्र रिश्ते को बताएं।मानसिकता बदलेगी तभी सब कुछ बदलेगा।नजरिया बदलें.. सोच बदलेगी.. तभी गंदी मानसिकता से आजादी मिलेगी।बच्चीयों ,महिलाओं को सम्मान देना बचपन से बतलायें तभी सोच अच्छी रहेगी सम्मान नारी के प्रति रहेगा।नयी सोच नया बदलाव लाएं । नारी और भी सशक्तिकरण की तरफ कदम आगे बढ़ा पाएगी।नारी पुरी तरह सशक्त हो उठेगी बस जरूरत है समाज में थोड़े से बदलाव की एक और पहल की। 

निक्की शर्मा रश्मि

मुंबई

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