संस्कार और भाग्य
हमारे मन कर्म और वचन हमारे माता पिता के दिए संस्कारों पर निर्भर होते हैं और इन्ही से हमारा भाग्य निर्मित होता है ,अतः किसी की देखा देखी या किसी के कहने में आकर उनमें बदलाव मत कीजिए, आप जैसे हैं वैसे ही रहें, अपनी पहचान को खोने मत दीजिए
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by namratapandey