नियति

*एक विधवा औरत.. उसका एक मंदबुद्धि बेटा, एक मंदबुद्धि बेटी और एक हैरान परेशान भ्रष्टाचारी दामाद*.. *किसी समय तूती बोलती थी औरत की.. लेकिन काम गलत कर रही थी... जिस देश ने उसको मान सम्मान दिया.. इतना ताकतवर बनाया.. उसी देश और उन्हीं लोगों के खिलाफ उसने साज़िशें रची.. देश को गर्त में डाला.. देश की मासूम जनता को आतंकियों से मरवाया.. खूब भ्रष्टाचार किया.. बेरहमी से देश का खज़ाना लूटा.. देश के स्वाभिमान को तार तार करके रख दिया*.. *लेकिन कहते हैं न ऊपर वाले की लाठी में आवाज़ नहीं होती है.. वो बड़े से बड़े अत्याचारी अहंकारी को समय के साथ धूल चटा देता है... आज उसी दौर से कभी देश की करोड़ों जनता का भाग्य विधाता रहा ये परिवार आज उस मानसिक तनाव और तकलीफों से गुज़र रहा है जिसकी कभी उसने कल्पना भी नहीं की थी*.. *इस परिवार के बनाये गए सिस्टम और चक्रव्यूह को एक अकेला भेदने निकला था.. और उसने काफी हद तक भेद भी दिया है और इसी कारण से आज ये परिवार परेशान है.. शायद यही वजह थी कि पहली बार कल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में इस परिवार का कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं हुआ*.. *क्योंकि इनको उस आदमी को पूरे समय देखना और सुनना पड़ता जिसने इनका जीना मुहाल कर रखा है.. जिससे ये परिवार सबसे ज़्यादा नफ़रत करता है.. जिसको इन्होंने भी तब खूब परेशान किया था जब सत्ता का हर सूत्र इनके हाथ में था और सत्ता के दुरुपयोग को ये अपना अधिकार समझते थे.. लेकिन तब भी ये उसका कुछ नहीं बिगाड़ सके थे लेकिन पिछले 5 सालों में ही उसने उनके इस तिलिस्म को तोड़ना शुरू करके उनमें घबराहट तो पैदा कर ही दी है*.. *माँ को लगा कि बेटे को कमान सौंपकर और दुबारा राजपाट हासिल कर हम फिर से मौज करने लगेंगे.. इसके लिए भी साम दाम दंड भेद हर नीति को अपनाया गया.. उसकी साफ सुथरी उजली छवि पर खूब कीचड़ उछाले.. झूठे आरोप लगाए.. बेटा दिन रात.. सुबह शाम गंद फैलाता रहा.. इस बार देश की जनता ने भी इस परिवार के दंभ को चकनाचूर करके रख दिया और उनकी पहले से भी ज़्यादा दुर्गति करके रख दी*.. *बेटा बेटी मिलकर कुछ नहीं कर पा रहे थे.. बेटे ने घबराकर कहा मुझे नहीं चाहिए पार्टी की कमान तो इस परिवार के गुलामों ने फिर से उसी औरत को अपना मालिक बनाया और तलवे चाटने की प्रथा को जारी रखा.. दामाद ने अपनी सास के दौर में जो घोटाले किये थे दामाद उसी कारण रोज़ जाँच एजेंसियों के चक्कर लगा रहा है और बेटी ऊलजलूल बयान देकर उसी के लिए मुसीबतें खड़ी करती जा रही है*.. *नियति का खेल देखिये.. चायवाले के यहाँ विश्व का सबसे शक्तिशाली प्रधानमंत्री पैदा हुआ और प्रधानमंत्रियों के घर में चाय तक न बेच पाने काबिल नालायक लड़का पैदा हुआ*.. *नियति हिसाब करने पर आमादा है.. और परिवार भी समझ ले कि अब सत्ता उसके लिए दिवास्वप्न से ज़्यादा कुछ नहीं है और इस देश, हिंदू धर्म के ख़िलाफ़ रची गई साज़िशों की सज़ा उसे भुगतनी ही पड़ेगी*

Aman G Mishra
19 Aug, 2019 • 0 mins read min read • hi
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नियति

*एक विधवा औरत.. उसका एक मंदबुद्धि बेटा, एक मंदबुद्धि बेटी और एक हैरान परेशान भ्रष्टाचारी दामाद*..


*किसी समय तूती बोलती थी औरत की.. लेकिन काम गलत कर रही थी... जिस देश ने उसको मान सम्मान दिया.. इतना ताकतवर बनाया.. उसी देश और उन्हीं लोगों के खिलाफ उसने साज़िशें रची.. देश को गर्त में डाला.. देश की मासूम जनता को आतंकियों से मरवाया.. खूब भ्रष्टाचार किया.. बेरहमी से देश का खज़ाना लूटा.. देश के स्वाभिमान को तार तार करके रख दिया*..


*लेकिन कहते हैं न ऊपर वाले की लाठी में आवाज़ नहीं होती है.. वो बड़े से बड़े अत्याचारी अहंकारी को समय के साथ धूल चटा देता है... आज उसी दौर से कभी देश की करोड़ों जनता का भाग्य विधाता रहा ये परिवार आज उस मानसिक तनाव और तकलीफों से गुज़र रहा है जिसकी कभी उसने कल्पना भी नहीं की थी*..


*इस परिवार के बनाये गए सिस्टम और चक्रव्यूह को एक अकेला भेदने निकला था.. और उसने काफी हद तक भेद भी दिया है और इसी कारण से आज ये परिवार परेशान है.. शायद यही वजह थी कि पहली बार कल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में इस परिवार का कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं हुआ*..


*क्योंकि इनको उस आदमी को पूरे समय देखना और सुनना पड़ता जिसने इनका जीना मुहाल कर रखा है.. जिससे ये परिवार सबसे ज़्यादा नफ़रत करता है.. जिसको इन्होंने भी तब खूब परेशान किया था जब सत्ता का हर सूत्र इनके हाथ में था और सत्ता के दुरुपयोग को ये अपना अधिकार समझते थे.. लेकिन तब भी ये उसका कुछ नहीं बिगाड़ सके थे लेकिन पिछले 5 सालों में ही उसने उनके इस तिलिस्म को तोड़ना शुरू करके उनमें घबराहट तो पैदा कर ही दी है*..


*माँ को लगा कि बेटे को कमान सौंपकर और दुबारा राजपाट हासिल कर हम फिर से मौज करने लगेंगे.. इसके लिए भी साम दाम दंड भेद हर नीति को अपनाया गया.. उसकी साफ सुथरी उजली छवि पर खूब कीचड़ उछाले.. झूठे आरोप लगाए.. बेटा दिन रात.. सुबह शाम गंद फैलाता रहा.. इस बार देश की जनता ने भी इस परिवार के दंभ को चकनाचूर करके रख दिया और उनकी पहले से भी ज़्यादा दुर्गति करके रख दी*..


*बेटा बेटी मिलकर कुछ नहीं कर पा रहे थे.. बेटे ने घबराकर कहा मुझे नहीं चाहिए पार्टी की कमान तो इस परिवार के गुलामों ने फिर से उसी औरत को अपना मालिक बनाया और तलवे चाटने की प्रथा को जारी रखा.. दामाद ने अपनी सास के दौर में जो घोटाले किये थे दामाद उसी कारण रोज़ जाँच एजेंसियों के चक्कर लगा रहा है और बेटी ऊलजलूल बयान देकर उसी के लिए मुसीबतें खड़ी करती जा रही है*..


*नियति का खेल देखिये.. चायवाले के यहाँ विश्व का सबसे शक्तिशाली प्रधानमंत्री पैदा हुआ और प्रधानमंत्रियों के घर में चाय तक न बेच पाने काबिल नालायक लड़का पैदा हुआ*..


*नियति हिसाब करने पर आमादा है.. और परिवार भी समझ ले कि अब सत्ता उसके लिए दिवास्वप्न से ज़्यादा कुछ नहीं है और इस देश, हिंदू धर्म के ख़िलाफ़ रची गई साज़िशों की सज़ा उसे भुगतनी ही पड़ेगी*

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