नारी वाद या नारी सशक्तिकरण
सपने टूटने के बाद फिर देखने के हौंसले को जिन्दगी कहते हैं
सही है क्या?
ना उम्मीदी से उम्मीद की ओर
कुछ तो था जो बाहर आना चाहता था
अपनी कहानी खुद लिखो अपने हाथो से
सोशल मीडिया या असली दुनिया
दिव्यांगता भी हौसलों को हरा नहीं सकती