राम मेरी नज़र से

मेरी नज़रो से राम का अनछुआ पक्ष

Sumita Sharma
07 Aug, 2020 • 1 min read • hi
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राम मेरी नज़र से

Photo by Ravin Rau on Unsplash

राम होना है कहां आसान जग में।

अनगिनत हैं शूल पुरूषोत्तम के पग में

Photo by <a href="https://unsplash.com/@limbanipr" target="_blank">pr.</a> on <a href="https://unsplash.com" target="_blank">Unsplash</a>

Photo by pr. on Unsplash

बाट सिंहासन की थी तब वन मिला

प्रिय हरण का और दारुण दुःख मिला

लड़ गया भुजबल में भारी दाशमुख से

अनगिनत है शूल ...


सिय परीक्षा दोष भी निज सिर लिया

किन्तु न संशय नहीं इक पल किया

राजव्रत ही उच्च था कर्तव्य मग में

अनगिनत है शूल...


शत्रु से लड़ना सहज था सम जो होता

प्रिय पे नित आरोप पर किस भांति सहता

हार बैठा पति, प्रजा के शब्द बल से

अनगिनत हैं शूल...


मान हर स्त्री को जीवन में दिया

पर तमस में ही रहा हिय का दिया

युद्ध खुद से ही लडा अंतर समर में

अनगिनत है शूल...


अनकही पीड़ा गरल सी पी गया

जो भी छीना जग ने देता ही गया

फिर भी आरोपों से लथपथ ध्रुव शपथ में

अनगिनत है शूल...

सुमिता शर्मा

कानपुर

मौलिक

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