Microfables
"Quote your quotes"
Shikha Shrivastava
02 May, 2021
एहसान
Shweta Agarwal
02 May, 2021
Dedicated to my bua whom we lost due to covid
Deepali tiwari
01 May, 2021
आज पर्यावरण का असंतुलन हम मनुष्यों की वजह से है
Kumar Sandeep
01 May, 2021
Writing_Tips
Kumar Sandeep
01 May, 2021
Writing_Tips
Shikha Shrivastava
01 May, 2021
बेतहाशा काटे वृक्ष,अब क्यूँ है,तड़प रहा। ऑक्सिजन के लिए ,दर -दर भटक रहा। प्रकृति ने जो कुछ दिया था मुफ्त मैं। पाने के लिए अब तुझे, हर जतन करना पड़ रहा। प्रकृति को रौंद कर,खुद को समझता ख़ुदा। क्रोध पर उसके अब, क्यूँ है गिड़गड़ा रहा। जल को मलिन, किआ खूब तालाब- कुएं पाट के। बून्द -बून्द पानी को, मछ्ली की तरह मचल रहा। हवा की जगह है धुआं, वर्षा की जगह आँधियाँ। एक -एक सांस को मशीनों पे निर्भर हुआ। धूप थी जो खिली,अब तुझको ना मिली। बन्द घुटते से घरों में,रोज़- रोज़ मर रहा। अब क्यूँ, तू गिड़गड़ा रहा। प्रकृति का रौद्र रूप, तुझको क्यूँ अखर रहा। शिखा 24:04:2021
Kumar Sandeep
01 May, 2021
Writing tips