ਰੰਗ

ਖੁਸ਼ੀ ਵਾਲੇ ਰੰਗ

Manpreet Makhija
18 May, 2020 0 mins read min read pa
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ਰੰਗ

"ਕੰਚਨ.... ਕਿਹੜੀ ਸਾੜੀ ਪਸੰਦ ਆਂ ਤੈਨੂੰ!, ਚੱਲ ਤੂੰ ਵੀ ਪਸੰਦ ਕਰ ਲੈ। ਦੀਵਾਲੀ ਤੇ ਤੇਰਾ ਵੀ ਤੋਹਫ਼ਾ ਨਿੱਬੜ ਜਾਏ ਇਸੀ ਬਹਾਨੇ।" ਸ਼ਵੇਤਾ ਨੇ ਅਪਣੀ ਨੌਕਰਾਣੀ ਨੂੰ ਕਿਹਾ।

ਲੇਕਿਨ ਕੰਚਨ ਦਾ ਤੇ ਅੱਜ ਕਿਸੀ ਕੱਮ ਵਿੱਚ ਧਿਆਨ ਹੀ ਨਹੀਂ ਸੀ। ਸ਼ਵੇਤਾ ਨੇ ਨੇਹੜੇਜਾਕੇ ਪੁੱਛਿਆ ਤੇ ਕੰਚਨ ਰੋਣ ਲੱਗੀ।

"ਮੇਮਸਾਬ, ਮੇਰੇ ਘਰਵਾਲੇ ਦੀ ਤਬੀਯਤ ਬਿਲਕੁੱਲ ਠੀਕ ਨਹੀਂ, ਸ਼ਰਾਬ ਪੀ ਪੀ ਕੇ ਉਸਨੇ ਅਪਣਾ ਹਾਲ ਬੁਰਾ ਕਰ ਲਿਆ, ਪਤਾ ਨਹੀਂ ਆਣ ਵਾਲੀ ਦੀਵਾਲੀ ਵੀ ਅਸੀਂ ਨਾਲ ਮਣਾ ਪਾਵਾਂਗੇ ਜਾਂ ਨਹੀਂ!"

ਸ਼ਵੇਤਾ ਨੇ ਕੰਚਨ ਦੀ ਮਦਦ ਦਾ ਫ਼ੈਸਲਾ ਲਿਆ। ਦੀਵਾਲੀ ਨੂੰ ਅਜੇ 10 ਦੀਨ ਬਾਕੀ ਸਨ। ਸ਼ਵੇਤਾ ਨੇ ਕੰਚਨ ਦੇ ਆਦਮੀ ਦਾ ਇਲਾਜ ਕਰਵਾਇਆ, ਮਾਮੂਲੀ ਪੇਟ ਦਰਦ ਸੀ ਜੋ ਜਲਦੀ ਹੀ ਠੀਕ ਹੋ ਗਿਆ ਨਾਲੇ ਸ਼ਵੇਤਾ ਨੇ ਕੰਚਨ ਦੇ ਆਦਮੀ ਨੂੰ ਸ਼ਰਾਬ ਛੁਡਵਾਣ ਦੀ ਵੀ ਦਵਾਈ ਲੈ ਦਿੱਤੀ। ਹੁਣ ਕੰਚਨ ਦਾ ਘਰਵਾਲਾ ਆਪਣੀ ਬੁਰੀ ਆਦਤਾਂ ਤੋਂ ਆਜ਼ਾਦ ਹੋ ਗਿਆ। ਕੰਚਨ ਨੇ ਅਪਣੀ ਮਾਲਕੀਨ ਨੂੰ ਕਿਹਾ, "ਭਾਵੇਂ ਤਿਓਹਾਰ ਦੀਵਾਲੀ ਦਾ ਹੋਵੇ ਪਰ ਤੁਸੀਂ ਮੇਰੇ ਜੀਵਨ ਵਿੱਚ ਖੁਸ਼ੀ ਦੇ ਰੰਗ ਭਰ ਦਿੱਤੇ।"

ਵਾਕਈ, ਕਿਸੇ ਲੋੜਵੰਦ ਦੀ ਮੱਦਦ ਕਰਨਾ ਕਿਸੀ ਤਿਓਹਾਰ ਵਰਗੀ ਹੀ ਖੁਸ਼ੀ ਦੇਂਦਾ ਹੈਂ।

©ਮਨਪ੍ਰੀਤ ਮਖਿਜਾ

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