एक पति की अपनी पत्नी से अपेक्षा क्या होती है

एक पति की अपनी पत्नी से अपेक्षा क्या होती है

Bhavna Thaker
20 Apr, 2021 • 1 min read min read • hi
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#Prem Bajaj
एक पति की अपनी पत्नी से अपेक्षा क्या होती है

"एक पति की अपनी पत्नी से अपेक्षा क्या होती है" 

बेशुमार प्यार और परवाह के बदले एक छोटा सा कमिटमेन्ट की "मेरे आशियाने की गरिमा को बनाए रखना" मैं अपना पूरा असबाब, मेरी पूरी दुनिया तुम्हारी हथेलियों पर रख रहा हूँ उसका सम्मान बढ़ाना। 

पति सुबह से शाम तक परिवार निर्वाह के लिए अर्थोपार्जन में पसीजते ज़िंदगी की चुनौतियों से जूझ रहा होता है। एक विश्वास के साथ की मेरी गैर मौजूदगी में कोई है जो मेरे परिवार की रखवाली करते संभाल रहा है। कितना कुछ देता है, कितना कुछ सहता है माँ बाप की, पत्नी की, बच्चों की सबकी ज़िम्मेदारी अपने इकलौते कंधे पर लादें। सबकी खुशी का खयाल रखने वाला बदले में इतना ही चाहता है की, जब थका हारा घर लौटे तो परिवार हंसता खेलता मिले। सुंदर सी पत्नी होंठों पर मुस्कान लिए पानी के ग्लास संग एक कप चाय पूछे। माँ बाप के चेहरे पर संतोष और बच्चों कि किलकारियों से गूँजता घर, अगर इतना मिले तो राम कसम पुरुष की पूरे दिन की थकान पल भर में पिघल जाएगी। 

पर कई पत्नियों की आदत होती है ना खुद खुश रहती है न घर में खुशी का माहौल रखने में कामयाब होती है। पति के घर आते ही शिकायत की लंबी लिस्ट और तानें, उल्हाने की गठरी खोलकर बैठ जाती है। ये नहीं देखती की एक इंसान थक मांदा लोटा है थोड़ा सुस्ताए, दो घड़ी आराम कर ले उसके बाद रामायण चालू करे। हर पत्नी को अपने पति की हर तरह की लिमीट पता होनी चाहिए, चाहे कमाई की हो चाहे प्यार जताने की।

अपने पति की चद्दर जितनी हो उतने ही पैर फैलाने चाहिए, दूसरों की देखादेखी में अपने पति की तुलना किसी और से करके तानें मारना गलत बात है। पति आपकी हर जरूरतों का खयाल रखने की तमाम कोशिश करता है, तो पत्नी का फ़र्ज़ बनता है कि घर को स्वर्ग सा सुन्दर बनाने की पूरी कोशिश करें। किसी मर्द को प्यार जताना नहीं आता हो तो उसका मतलब ये नहीं की पत्नी की परवाह नहीं, शब्दों में मत ढूँढिए पुरुष को अपने दिल में ढूँढिए। शब्दों को नहीं अहसास को मायने दो। जो आपके जीवन बाग का माली अपनी दुनिया आपको सौंप कर निश्चिंत सा आपके हर सपने में रंग भरता है।

लगभग हर पति अपनी पत्नी को खुश देखना चाहता है इसलिए पत्नी की हर बात में हाँ में हाँ मिलाते मौन को अपना हथियार बना लेता है, की चलो मेरी एक हाँ से परिवार की शांति बनी रहेगी।

घर परिवार को एक सूत्र में बाँधकर रखना हर स्त्री कि जिम्मेदारी और फ़र्ज़ होता है। घर की देखभाल करना, पति के कंधे से कंधा मिलाकर उनके हर फैसले में साथ खड़े रहना, बुज़ुर्गो का ख़याल रखना और बच्चों को संस्कार देकर अच्छा नागरिक बनाना हर स्त्री का काम है। जो इन सारी चीज़ों को निभा जाती है वही स्त्री लक्ष्मी का रुप होती है। 

पर कई बार देखा जाता है की पति के सीधेपन और शांत स्वभाव का कई पत्नियां गलत फ़ायदा उठाती है। घर परिवार और बच्चें हर पुरुष की कमज़ोरी होती है। अपना परिवार बिखर ना जाए इसलिए पत्नी के कर्कश स्वभाव को झेलता रहता है, और उसका दुरुपयोग करते पत्नियां सर चढ़ जाती है और पति को प्रताड़ित करती रहती है यहाँ तक की हाथ तक उठा लेती है उस पर पति कोई रिएक्ट नहीं करता, मर्द हाथ नहीं उठा सकता, कानून जो स्त्री के हक में है। इसी वजह से आज कई मर्दों को अपने वजूद को बचाने के लिए गुहार लगानी पड़ती है। जिसके फलस्वरूप आज कई जगहों पर पत्नी पीड़ित पतियों के आश्रम बन रहे है। जो स्त्रियों की गरिमा पर एक लांछन है।

और लगभग सारे कानून स्त्रियों के हक में होने की वजह से पुरुष चाह कर भी कोई ठोस कदम उठाने से डरता है, और इन सारे कानूनों का ज़्यादातर दुरुपयोग होते देखा जाता है। कई बार स्त्री द्वारा लगाए गए इल्ज़ाम गलत होते है, चाहे बलात्कार हो, दहेज हो, या दमन हो कानून अपने हक में ना होने की वजह से पुरुष के हाथ बंधे हुए होते है। हर बार पुरुष गलत नहीं होता, कुछ औरतों की फ़ितरत और स्वभाव घर को नर्क से भी बदतर बना देता है। बहुत कम मर्द इस दर्द को बयाँ कर पाते है, जुबाँ खोलने से डरता है कि लोग जानेंगे तो क्या सोचेंगे, मैं अपनी पत्नी का गुलाम हूँ या पत्नी से डरता हूँ जो पत्नी के हाथों दमन झेल रहा हूँ। नहीं नांहि आप कमज़ोर है, नांहि पत्नी के गुलाम आप अपने घर परिवार को बचाने की जद्दोजहद में झेल रहे हो। पर अगर किसीको प्रताड़ित करना पाप और गुनाह है तो प्रताड़ना सहना भी पाप है, मुँह खोलो और अपने दर्द को मुखर करो, पत्नी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाओ। और स्त्रियों को अपने किरदार और गरिमा का मान रखना चाहिए। पति आपके सर का ताज है उसका अपमान शोभा नहीं देता। पूछो उनसे जिनके सर से पति का साया हट गया है, पति के बिना पत्नी का कोई वजूद नहीं। आपका साया, आपका हमसफ़र, आपका रखवाला, और एक मजबूत स्तंभ है जो आपको कभी परास्त होने नहीं देगा। उम्र रहते कद्र कर लो, एक बार अगर साथ और हाथ छूट जाता है तब दुनिया की कोई चीज़ उस इंसान की कमी पूरी नहीं कर पाएगी। समझदारी से समेट लो अपना आशियाना ज़िंदगी बहुत छोटी है कब दगा दे जाए कहा नहीं जाता।

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

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