मेलुकोटॆ चॆलुवनारायण (Part 2)

चार नामाधिक श्री वैष्णव तीर्थ क्षेत्रांतु मेलुकोटॆ वरेन एक. आस्तिक बांधवांक हाजॆ परिचय कॊरनु दिवचॆ एक सान प्रयतन हे!

Argodu Suresh Shenoy
21 Sep, 2020 1 min read min read mr
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मेलुकोटॆ चॆलुवनारायण (Part 2)

मेलुकोटॆ चॆलुव नारायण म्हळसत्ता थंयि चॊलचॆ वैरमुडि उत्सवु मस्त प्रख्यात जाव्नास्स. अवुंदु मार्च् १६ ताकूनु २५ पर्यंत वैरमुडि उत्सवु घडलॆ. वैरमुडि म्हणचॆ वज्रखचित एक किरीट. हे भगवंतालॆ किरीट म्हणचॆ नंबिगास्स. प्रह्लादालॊ नात्तु विरोचान हे किरीट चोरनु पाताळाक व्हरनु निप्पूनु दवर्लॆ खंयि. तॆद्दना गरुड पाताळाक यवनु विरोचाक हारोनु किरीट परत घॆवुनु यत्त खंयि. तॆद्दना कृष्णावतार वेळु. विष्णुक सॊत्ता आय्यिलॆ गरुडाक वाट्टॆरि श्री कृष्णु मॆळ्ता. गरुडु त्या किरीट श्री कृष्णाक दित्ता. तॆद्दना श्री कृष्णु त्या किरीट परत गरुडाक दीव्नु “खंचॆ देवालॆ मात्तॆक हे किरीट सम जात्तकि, तांका घालि म्हणता. गरुड त्या घॆवुनु वॆंकटरमण, कंचिवरदस्वामि सहित वॆग्ळॆ वॆग्ळॆ देवाक घालता. जाल्यारि कोणाक त्या सम जायना. परत श्री कृष्ण लाग्गि आय्यिलॊ गरुड त्या किरीट कृष्णाक दित्ता. श्री कृष्णु आपणालॆ देवाकूडांतु आस्सुचॆ मूर्तिक त्या किरीट घालता. ताक्क त्या सम जात्ता. तॆद्दना गरुड त्या घेव्नु कुशेन नांचाक लागता. थंचान वैरमुडि उत्सवु चोल्नु ऎत्ता आस्स म्हणचॆ नंबिग. 


वैरमुडि उत्सवु गरुडालॆ वय्रि चलता. त्या मुखेन वैरमुडिक आनि गरुडाक संबंध आस्स म्हणचाक आधार मॆळता. तिरुपति, श्रीरंग, कंचि, आनि मेलुकोटॆंतु गरुडालॆ उत्सवु घड्ता. वैरमुडि उत्सवांतु आजु-बाजून श्रीदेवि आनि भूदेवि आसताति. तॆद्दना वैरमुडि किरीट आस्सुचॆ निमित्त हे उत्सव पळोचॆ निमित्त सर्पदोष आनि इतर दोष नाश जात्ता म्हणचॆ नंबिगा भक्त लोकांतु आस्स. 


वैरमुडि उत्सव वेळ्यारि प्रतिवर्ष डिस्टिक् ट्रजरि ताकूनु वज्रखचित वैरमुडि, राजमुडि, शंख, चक्र, पद्मपीठ इत्यादि १६ दागीन श्री चॆलुव नारायणाक घालचॆ खातॆरि मॆरवणिगेरि घॆवुनु व्हरताति. ट्रजरि ताकूनु काळ्ळ सत्ता पय्लॆ लक्ष्मी जनार्धन स्वामिक पूजा करताति. त्या आभरण मेलुकोटॆक पाव्लॆ सत्ता डि.सि., पंच आनि अर्चका समक्षम परिशीलन कॊरनु रात्तिक ८ गंट्याक चॆलुवनारायण स्वामिक घाल्नु वैरमुडि उत्सवु सूरु जात्ता. हॆर्‍दीसु सक्काणिपूडॆ चार गंट्या पर्यंत हे उत्सवु घड्ता. मागिरि राजमुडि उत्सवु सूर जात्ता. ऒट्टारॆ हे उत्सव वेळ्यारि मेलुकोटॆंतु वैकुंठूचि देव्नु आय्यिल वरि दिस्ता म्हॊणु कॆलव भक्त सांगताति. मेलुकोटॆचॆ गुड्डॆ वय्रि श्री योगा नरसिंहस्वामि दॆवळ आस्स. आनि हे गुड्डॆक श्री योगा नरसिंहस्वामि गुड्डॊ म्हॊणू आपयताति. 


मेलुकोटॆ कश्शि एक पुण्यक्षेत्रकि तश्शिचि धार्मिक क्षेत्र सहित जाल्ला. कन्नडांतु श्रेष्ठ गीतनाटक बरॆयिलॊ कवि पुतिन जन्मिलॆ हेंचि गांवांतु. तान्नि जन्मिलॆ घर आत्त स्मारक जाल्ला. 


हे गांव्चॆ वरनंदि दॆवळा खातिरि एक काणि आस्स. हे मूर्ति दॆहलि सुल्तानालॆ रावळारांतु आश्शिल खंयि. सुल्ताना धूव वरनंदिक पूज्जिताश्शिल खंयि. हे कळीताक हाड्नु घॆत्तिलॆ श्री रामानुजनि दॆहलिक वच्चुनु वरनंदि विग्रह घॆवुनु मेलॆकोटॆक हाडलॆ खंयि. जाल्यारि सुल्ताना धूव्याक हाज्जेन मस्त दुःख जाव्नु ती वरनंदि माकशि यव्नु देवा भित्तरि ऐक्य जाल्लि खंयि. हाज्जॆ गुर्ताक नारायणालॆ पाय्यामूळांतु वरनंदि विग्रह आस्स. हिक्का बेबिनाच्चियार् म्हॊणु आपयताति. हाज्जॆ उडगासाक प्रतिवर्ष आश्वयुज शुद्ध सप्तमि दिवसु हांगा डॆल्लि उत्सवु घड्ता. हाज्ज लाग्गीचि प्रख्यात पक्षिधाम रंगनतिट्टु, श्रीरंगपट्टण रावळार, मैसूरु, झू इत्यादि प्रेक्षणिय जागो पळोवचाक मॆळ्ता. रावचाक मंड्य जांवॊ मैसूरांतु चांग सौकर्य आस्स. 

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