# पर्याप्त
#पर्याप्त प्रभु ने दिया एक ही मुख,कम बोलो पाओगे सुख- कान दिये ‘दो’सुनो अधिक,मौन साधकर चलो पथिक, अति से अमृत विष बन जाता ,मत भूलो यह बात- तृप्ति और संयम के बल पर अर्जित कर लो पर्याप्त.

Paperwiff

by anjugahlot

07 Feb, 2026

#पर्याप्त

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