श्री अरुण जेटली

जेटली जी का सरल स्वाभाव उनके विशाल व्यक्तित्व में चार चाँद लगाता था। युवाओं के आदर्श जेटली जी की मदद करने की आदत उन्हें और भी प्रमुख बनाती है जैसा कि सबको ज्ञात है कि कॉलेज के दिनों में उन्होंने श्री रजत शर्मा जी की अक्सर मदद किया करते थे, चाहे वो आर्थिक रूप से हो या एक दोस्त के रूप में हो, यही मदद आज शायद एक महान पत्रकार को जन्म देती है और देश को गौरवान्वित होने का अवसर देती है। ऐसे पुरोधा व्यक्तित्व को कोटि कोटि नमन!!

Aman G Mishra
28 Aug, 2019 1 min read min read hi
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श्री अरुण जेटली

# स्व.अरुण जेटली जी.. स्मृति शेष .....(अवश्य पढ़ें)

जहां अरुण जेटली के बच्चे पढ़े, 

उन्होंने अपने ड्राइवर और कुक के बच्चों को भी वहीं पढ़ाया


दान वही, जो गुप्तदान हो और मदद वही, जो दूसरे हाथ को भी पता न चले। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली भी कुछ ऐसा ही किया करते थे। जेटली अपने निजी स्टाफ के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते थे। उनके परिवार की देखरेख भी अपने परिवार की तरह ही करते थे, क्योंकि वे इन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानते थे। दूसरी ओर, कर्मचारी भी परिवार के सदस्य की तरह जेटली की देखभाल करते थे। उन्हें समय पर दवा देनी हो या डाइट, सबका बखूबी ख्याल रखते थे। 


जेटली ने एक अघोषित नीति बना रखी थी, जिसके तहत उनके कर्मचारियों के बच्चे चाणक्यपुरी स्थित उसी कार्मल काॅन्वेंट स्कूल में पढ़ते हैं, जहां जेटली के बच्चे पढ़े हैं। अगर कर्मचारी का कोई प्रतिभावान बच्चा विदेश में पढ़ने का इच्छुक होता था तो उसे विदेश में वहीं पढ़ने भेजा जाता था, जहां जेटली के बच्चे पढ़े हैं। ड्राइवर जगन और सहायक पद्म सहित करीब 10 कर्मचारी जेटली परिवार के साथ पिछले दो-तीन दशकों से जुड़े हुए हैं। इनमें से तीन के बच्चे अभी विदेश में पढ़ रहे हैं। 


सहयोगी का एक बेटा डॉक्टर, दूसरा बेटा इंजीनियर जेटली परिवार के खान-पान की पूरी व्यवस्था देखने वाले जोगेंद्र की दो बेटियों में से एक लंदन में पढ़ रही हैं। संसद में साए की तरह जेटली के साथ रहने वाले सहयोगी गोपाल भंडारी का एक बेटा डॉक्टर और दूसरा इंजीनियर बन चुका है। इसके अलावा समूचे स्टाफ में सबसे अहम चेहरा थे सुरेंद्र। वे कोर्ट में जेटली के प्रैक्टिस के समय से उनके साथ थे। घर के ऑफिस से लेकर बाकी सारे काम की निगरानी इन्हीं के जिम्मे थे। जिन कर्मचारियों के बच्चे एमबीए या कोई अन्य प्रोफेशनल कोर्स करना चाहते थे, उसमें जेटली फीस से लेकर नौकरी तक का मुकम्मल प्रबंध करते थे। जेटली ने 2005 में अपने सहायक रहे ओपी शर्मा के बेटे चेतन को लॉ की पढ़ाई के दौरान अपनी 6666 नंबर की एसेंट कार गिफ्ट दी थी। 


बच्चों से लेकर स्टाफ तक सभी को चेक से पैसे देते थे जेटली वित्तीय प्रबंधन में सावधानी बरतते थे। एक समय वे अपने बच्चों (रोहन व सोनाली) को जेब खर्च भी चेक से देते थे। इतना ही नहीं, स्टाफ को वेतन और मदद सबकुछ चेक से ही देते थे। उन्होंने वकालत की प्रैक्टिस के समय ही मदद के लिए वेलफेयर फंड बना लिया था। इस खर्च का प्रबंधन एक ट्रस्ट के जरिए करते थे। जिन कर्मचारियों के बच्चे अच्छे अंक लाते हैं, उन्हें जेटली की पत्नी संगीता भी गिफ्ट देकर प्रोत्साहित करती हैं। 


जेटली जी का सरल स्वाभाव उनके विशाल व्यक्तित्व में चार चाँद लगाता था। युवाओं के आदर्श जेटली जी की मदद करने की आदत उन्हें और भी प्रमुख बनाती है जैसा कि सबको ज्ञात है कि कॉलेज के दिनों में उन्होंने श्री रजत शर्मा जी की अक्सर मदद किया करते थे, चाहे वो आर्थिक रूप से हो या एक दोस्त के रूप में हो, यही मदद आज शायद एक महान पत्रकार को जन्म देती है और देश को गौरवान्वित होने का अवसर देती है।

ऐसे पुरोधा व्यक्तित्व को कोटि कोटि नमन!!

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