ManuJain
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इक आग कोई सुलगती है अंदर डूबना नहीं ये मुस्कुराहट है समुन्दर.....?
उर्दू (शेर)
तुझे देखकर मेरा खिल जाना
अनेकता में एकता
मैं कविता नहीं , एहसास लिख रही हूं आज तुम्हारे लिए कुछ खास लिख रही हूं........
उर्दू ... (शेर)
लड़की हूं तो , संस्कारों का पाठ सीखूं मैं.......
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