ए लव स्टोरी

आज भी उनके प्यार की खुशबू महसूस होती है।

Dr. Pratik Prabhakar
22 Sep, 2021 • 1 min read min read • hi
❤️ 2 💬 2 👁 1331
ए लव स्टोरी

Photo by Nick Fewings on Unsplash


आकर्षण और प्रेम में रत्ती भर का अंतर है । आकर्षण अगर दिमाग की उत्पत्ति है तो प्रेम हृदय की। आजकल तो गर्लफ्रेंड ,बॉयफ्रेंड बनना बनाना कॉमन बात है। पर एक दशक पहले ऐसा बिल्कुल भी ना था । यह वह वक्त था जब फिल्में इतनी संजीदा नहीं हुआ करती थी ,लोग टेलीफोन का उपयोग करते थे ,फेसबुक, व्हाट्सएप और टिंडर उपलब्ध नहीं हुआ करता था।

मैं स्कूल में था कक्षा चौथी में। कक्षा में बैठा था कि एक ऊंची कक्षा के छात्र ने आकर मेरे शिक्षक को बताया कि मुझे प्रिंसिपल सर ने बुलाया है। मैं घबरा गया । पता नहीं क्या हुआ ।

मेरे साथ पांचवी कक्षा के अमर को भी बुलाया गया था । मैं जब प्रिंसिपल सर के चेंबर में पहुंचा अमर पहले से ही वहां मौजूद था। उसने मेरी तरफ तिरछी नजर से देखा और फिर सिर झुका लिया। प्रिंसिपल सर ने मुझसे एक कागज दिखाते हुए पूछा

" क्या यह तुमने सृष्टि को दिया है?"

मैंने हामी भर दी ।

मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था ,हाथ कांप रहे थे ,माथे पर पसीना था।

मैंने तुरंत कहा

"अमर भैया ने मुझे यह सृष्टि को देने को कहा था ।"

अमर मेरी तरफ गुस्से से देख रहा था पता नहीं उसने मन ही मन मुझे कितना कोसा होगा ।

प्रिंसिपल सर ने फिर मुझसे पूछा

"पता है इसमें क्या लिखा है ?"

मैंने कहा" नहीं "

प्रिंसिपल सर ने मुझे आगे से ऐसा न करने का हिदायत दिया और कक्षा में जाने के लिए कहा ।

पता नहीं अमर भैया के साथ क्या हुआ होगा ।


आज कई वर्ष बीत गए आज मुझे पता है कि उस कागज में क्या लिखा गया होगा ।

सृष्टि और अमर पांचवी में थे अमर सृष्टि को पसंद करता था। पर उसे कहने में हिचकिचाहट थी। प्रेम करने और जताने में काफी फर्क है ।कई बार प्रेम न जता पाने के कारण एक तरफा ही रह जाता है । ऐसा प्रेम सिर्फ एक दिल में ही घर किए हुए दशकों तक छुपा रहता है ।कई बार लोग प्रेम जता नहीं सकते चाहे कारण कुछ भी हो।

शायद इसीलिए अमर ने प्रेम जताने के लिए पत्र लिखा और मुझे पत्र वाहक बनाया ।

पत्र में शायद लिखा गया होगा ""आई लव यू सृष्टि --तुम्हारा अमर ""

साथ ही एक दिल बनाया गया होगा और उस से गुजरता हुआ तीर भी ।

मुझसे लंच ब्रेक में कागज दे अमर ने उसे सृष्टि को देने को कहा था और मैंने ठीक वैसा ही किया ।

पता नहीं पर शायद सृष्टि ने प्रिंसिपल सर से कंप्लेंन कर दिया होगा अमर को सजा मिली या नहीं मुझे पता नहीं ।

पर कुछ दिनों बाद मैंने अमर और सृष्टि को साथ में लंच करते देखा। फिर कुछ दिन बाद एक गिफ्ट शॉप पर जो स्कूल के पास ही था ।

आज अमर एक इंजीनियरिंग कॉलेज में अंतिम वर्ष का छात्र है और सृष्टि के बारे में मुझे पता नहीं ।

कुछ इस तरह कई कहानियां बनती है स्कूल में जो बाद में याद बनकर रह जाती है । हर स्कूल कितनी सारी पहली प्रेम कहानियों का साक्षी बनता होगा ।

मैंने आज तक कभी इसका जिक्र नहीं किया किसी से भी। पर जब याद आती है सांसो में उनके पहले प्यार की खुशबू मुझे भी महसूस होती है।


2 likes
☕

Support Dr. Pratik Prabhakar

Appreciate this story? Send a small tip to encourage the author to write more great work!

Please login to tip the author.

Dr. Pratik Prabhakar
Published By

Dr. Pratik Prabhakar

@Drpratikprabhakar

Comments

Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓

  • Vinita Tomar · 5 years ago last edited 5 years ago

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

  • Sushma Tiwari · 5 years ago last edited 5 years ago

    अहा खूबसूरत

Please Login or Create a free account to comment.

★ Recommended For You

Stories tailored to your recent reading preferences

More stories in Non-fiction
Saurabh Kumar Gautam • 09 Apr, 2026 • 1 min read min

नई दुर्गा

अन्याय के खिलाफ खड़े होने के लिए साहस जरूरी है, और रौशनी इसी साहस के कारण एक “नई दुर्गा” बनकर उभरती है।

214 0
More stories in Non-fiction
Adhiraj • 31 Oct, 2025 • 2 mins read min

कचरा

भेद भाव व असमानता अभी भी समाज को विभाजित किए हुए है | एक सत्य घटना पर आधारित लघु कहानी |

283 0
More stories in Non-fiction
fazal Esaf • 18 Jun, 2025 • 1 min read min

कहानी का शीर्षक: "मिट्टी के साथी"

"मिट्टी और मनुष्य" एक मार्मिक कहानी है जो शहरी जीवन की भागदौड़ और प्रकृति से अलगाव के बीच, मिट्टी और उसके सबसे छोटे जीवों — केंचुओं — के महत्व को दर्शाती है। कहानी फ़ज़ल एसाफ नाम के एक युवा, संस्कारी किसान के बेटे के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी गाँव की मिट्टी और उसके अनदेखे नायकों के प्रति गहरी समझ रखता है। कहानी की शुरुआत ठाणे के एक छोटे से कस्बे में बारिश के बाद की सुबह से होती है, जहाँ फ़ज़ल सड़क पर रेंगते केंचुओं को देखकर विचलित हो जाता है, क्योंकि लोग उन्हें बिना सोचे-समझे कुचल रहे हैं। वह एक केंचुए को उठाकर सुरक्षित स्थान पर रखता है और मन ही मन बुदबुदाता है कि लोग इस "कीड़े" की अहमियत नहीं समझते, जबकि यही उनकी "रोटियों" से जुड़ा है। आगे चलकर, फ़ज़ल का सामना तीन अलग-अलग राहगीरों से होता है: एक तेज़-तर्रार कॉर्पोरेट महिला, अदिति मैडम; एक अनुभवी बुज़ुर्ग, शास्त्री जी; और एक नन्हा लड़का, आर्यन। सबसे पहले, अदिति मैडम अनजाने में एक केंचुए को कुचल देती हैं। फ़ज़ल उन्हें रोकता है और विनम्रता से समझाता है कि यह "कीड़ा" नहीं, बल्कि "किसान का दोस्त" है जो मिट्टी को साँस देता है और ज़मीन को उपजाऊ बनाता है। अदिति शुरुआत में झिझकती हैं, लेकिन फ़ज़ल के शब्दों में छिपी सच्चाई उन्हें सोचने पर मजबूर कर देती है। इसके बाद, शास्त्री जी फ़ज़ल की बात का समर्थन करते हैं और अपने पुराने दिनों को याद करते हैं जब केंचुए को खेत में देखना अच्छी फसल का संकेत माना जाता था। वे आधुनिक समाज में मिट्टी से बढ़ती दूरी पर चिंता व्यक्त करते हैं। फ़ज़ल उन्हें समझाता है कि लोग मिट्टी को गंदगी समझते हैं, जबकि वही "गंदगी" उनकी थाली में गेहूं बनकर आती है, और केंचुए ही बिना किसी स्वार्थ के ज़मीन को जोतते हैं। कहानी में एक मार्मिक मोड़ तब आता है जब आर्यन, एक छोटा लड़का, केंचुए को "साँप जैसा कुछ" समझता है। फ़ज़ल धैर्य से उसे बताता है कि यह एक अर्थवर्म है जो मिट्टी को अंदर से जोतता है, हवा, पानी और बीज को पनपने में मदद करता है। वह आर्यन को समझाता है कि वह जो सब्ज़ियाँ खाता है, वे कहीं न कहीं केंचुए के कारण ही उगती हैं, जिससे आर्यन केंचुए को अपना दोस्त समझने लगता है। आर्यन की माँ भी इस छोटे लेकिन गहरे सबक के लिए फ़ज़ल को धन्यवाद देती हैं। एक छोटी सभा में, फ़ज़ल अदिति, शास्त्री जी और आर्यन को संबोधित करते हुए कहते हैं कि भले ही वे शहर में रहते हों और वह गाँव से हो, लेकिन "मिट्टी" ही वह धागा है जो उन सबको जोड़ता है। वह शहरी लोगों से मिट्टी के प्रति संवेदना रखने और छोटे जीवों को बचाने की अपील करता है। शास्त्री जी भावुक होकर कहते हैं कि जो समाज ज़मीन से रिश्ता तोड़ता है, वह रिश्तों की अहमियत भी भूल जाता है। कहानी का चरमोत्कर्ष तब आता है जब फ़ज़ल अपने झोले से एक मुट्ठी मिट्टी उठाता है जिसमें एक केंचुआ रेंग रहा होता है। वह भावनात्मक स्वर में समझाता है कि यह मिट्टी केवल मिट्टी नहीं, बल्कि "जीवन" है, जिसमें "मेहनत" और "उम्मीद" है। वह चेतावनी देता है कि जिस दिन केंचुए कम हुए, उस दिन रोटी भी महंगी हो जाएगी, मिट्टी बंजर हो जाएगी, और दिल भी। यह सुनकर आर्यन अब हर केंचुए को ध्यान से देखता है और वादा करता है कि वह उन्हें कुचलेगा नहीं। कहानी एक शक्तिशाली मोनोलॉग के साथ समाप्त होती है, जिसमें फ़ज़ल की आवाज़ बताती है कि शहर भले ही चमकता हो, लेकिन उसकी नींव वही मिट्टी है जो गाँवों में साँस लेती है। वह जोर देता है कि अगर हम मिट्टी को मारते रहेंगे, तो हम भी धीरे-धीरे मरेंगे, "बिना आवाज़ के, बिना मिट्टी के।" अंतिम पंक्तियाँ एक काव्यात्मक संदेश देती हैं: "जो रेंगता है ज़मीन पर, वो थामे है आसमान को। न कुचलिए उसे, क्योंकि वो पालता है हमें… चुपचाप।" संदेश: यह पटकथा एक सरल लेकिन गहन संदेश देती है: "ज़मीन पर चलिए, मगर ज़मीन को समझकर चलिए। क्योंकि वहीं से जीवन उगता है।" यह कहानी हमें प्रकृति के सबसे छोटे सदस्यों के महत्व को पहचानने और उसके साथ हमारे संबंध को फिर से स्थापित करने के लिए प्रेरित करती है।

369 0
More stories in Non-fiction
fazal Esaf • 02 Jun, 2025 • 1 min read min

बेघर: एक परिवार की अनकही पीड़ा

यह कहानी शम्सुद्दीन साहब और उनके परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनका पुश्तैनी घर, जो उनके जीवन का केंद्र था, को सरकारी बुलडोजर द्वारा बिना किसी चेतावनी के ढहा दिया जाता है। कहानी उनके दर्द, बेबसी और सदमे को बयां करती है। शम्सुद्दीन साहब और उनकी पत्नी, ज़ुबैदा खातून, अपने बच्चों और पोते-पोतियों के साथ, अचानक बेघर हो जाते हैं। कहानी में उनके परिवार के सदस्यों की अलग-अलग प्रतिक्रियाओं को दिखाया गया है - बच्चों का डर और भ्रम, ज़ुबैदा खातून का दर्द, और शम्सुद्दीन साहब का भीतर का संघर्ष। कहानी में यह भी दर्शाया गया है कि कैसे यह घटना सिर्फ एक घर का नुकसान नहीं है, बल्कि उनके सपनों, सुरक्षा और पहचान का भी नुकसान है। यह कहानी उन अनगिनत मुस्लिम परिवारों की पीड़ा को उजागर करती है, जिन्हें अक्सर अन्याय और बेबसी का सामना करना पड़ता है, और उनकी उस भावना को व्यक्त करती है कि यह देश उनका भी उतना ही है, जितना किसी और का। कहानी में दर्द के साथ-साथ, फिर से खड़े होने और जीवन को फिर से शुरू करने की प्रेरणा भी है।

524 0