बेड नंबर 74

मेरी माँ बच तो जायेंगी न, कहते हुए वह रोने लगा

Dr. Pratik Prabhakar
27 Apr, 2021 • 1 min read min read • hi
❤️ 3 💬 1 👁 859
#Human #Mother #Health
बेड नंबर 74

Photo by Olga Kononenko on Unsplash

"बेड नंबर 74"

"ये मरीज कहाँ गयी?" मैंने सिस्टर (नर्स) से पूछा । मैं बेड नंबर 74 की पेशेंट के बारे में पूछ रहा था। पिछले शनिवार को मैंने उस पेशेंट को देखा था वार्ड स्टडी के दरम्यान।वार्ड स्टडी काफी कुछ सिखाती है  चाहे वो पढाई से सम्बंधित हो या व्यव्यहारिक ज्ञान से सम्बंधित हो।

शनिवार को जब मैं हॉस्पिटल वार्ड को जा रहा था तो एक आदमी ने मुझे टोका और रिपोर्ट दिखाने लगा।रिपोर्ट दिखा के आदमी रोने लगा और पूछने लगा "मेरी माँ बच जायेगी न?" मुझे कोई जबाब नहीं सूझ रहा था । मैंने उनका ढाढस बढाने के लिए हाँ कह दिया।

वार्ड पहुँचने पर हमें हिस्ट्री लेना था पेशेंट से । हमने स्टार्ट किया प्रोफेसर ने हमें बेड नंबर 70 से हिस्ट्री लेकर आने को कहा।हमलोग जब पेशेंट के पास गए तो वो खाना खा रहा था । 6-7 रोटियां तो उसने हमारे सामने खा डाली। पर,जब हमने उनसे भूख के बारे में सवाल किया तो उनकी पत्नी तपाक से बोल पड़ी "इनको तो भूख लगती ही नहीं" । इसी वक्त मेरी नजर मेरे सहपाठी पर पड़ी और हम हलके मुस्कुरा रहे थे।

थोड़ी देर में हमने देखा की एक बूढी महिला का पति उसे डांट रहा था। महिला एकदम चुप। दरअसल पति का कहना था कि वो संतरा न खाए लेकिन महिला ने संतरा का एक फाँक मूहँ में रख लिया था। बाक़ी का बचा सन्तरा अब भी उसकी हाथ में था। पति ने झटक कर संतरा फर्श पर गिरा दिया और पत्नी को भी गिरा दिया। पत्नी रोने लगी और वार्ड का वातावरण करुणा से भर गया। नर्स के समझाने से मामला ठंडा हुआ।पितृ सत्तात्मक समाज की एक छवि हमलोग देख रहे थे। 

हमलोग प्रोफेसर के चैम्बर में जाने ही वाले थे कि प्रोफेसर खुद ही वार्ड में आ गए और एक बृद्ध महिला की रिपोर्ट देखने लगे। एक जाना पहचाना चेहरा मौजूद था वो था उस व्यक्ति का जिसने हमे रास्ते में रिपोर्ट दिखाई थी ।प्रोफेसर ने रिपोर्ट देखी और दवा लिख दी।साथ में उसे हिदायत दी कि वो चाहे तो अपनी माँ को ले के और बड़े अस्पताल में ले जा सकते है । बेटा रोने लगा। ये था बेड नंबर74।

मैं सोमवार को वार्ड गया और जल्दी से बेड नंबर 74 के पास गया। बेड ख़ाली था । मैंने सिस्टर से पूछा उन्होंने कहा मरीज की हालत काफी खराब हो गयी थी तो रेफर कर दिया गया। आखिर क्या हुआ होगा , मैं सोच रहा था।

फिर कुछ दिनों बाद मैंने मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के ओ पी डी में मैंने वही परिचित चेहरे देखें। अब मैं ख़ुशी महसूस कर रहा था।



3 likes
☕

Support Dr. Pratik Prabhakar

Appreciate this story? Send a small tip to encourage the author to write more great work!

Please login to tip the author.

Dr. Pratik Prabhakar
Published By

Dr. Pratik Prabhakar

@Drpratikprabhakar

Comments

Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓

  • Babita Kushwaha · 5 years ago last edited 5 years ago

    Suspens se bhari kahani bahut badiya Aur aacha lagta iska kuch end ho jata

Please Login or Create a free account to comment.

★ Recommended For You

Stories tailored to your recent reading preferences

Trending on Paperwiff
Sonnu Lamba • 14 Oct, 2026 • 1 min read min

पंचम स्कंदमाता

नवरात्र का पांचवां दिन, मां स्कंदमाता का ध्यान

2 1
Trending on Paperwiff
Sonnu Lamba • 14 Oct, 2026 • 1 min read min

कूष्मांडेति चतुर्थकम्

नवरात्र का चौथा दिन, कूष्माण्डा मां का स्वरूप और अनाहत चक्र पर ध्यान।

2 1
Trending on Paperwiff
Rakesh Nathani • 12 Oct, 2026 • 1 min read min

अंतिम संस्कार : लकड़ी

यहाँ इस कहानी का सबसे छोटा और सधा हुआ सार (Summary) है: यह कहानी एक रिटायर्ड प्रोफेसर और उनके बचपन के दोस्त (एक पेड़) की मार्मिक विदाई है। सालों बाद गाँव लौटने पर प्रोफेसर को पता चलता है कि हाईवे बनने के कारण कल उस पेड़ को काट दिया जाएगा। पेड़ बिना किसी शिकायत के अपनी मौत को स्वीकारता है और प्रोफेसर से अपना 'अंतिम संस्कार' करने को कहता है। अंत में, प्रोफेसर उसे काटने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। वे कुल्हाड़ी का लोहे वाला हिस्सा (जो मारने का प्रतीक है) वहीं छोड़ देते हैं और महज़ **लकड़ी का डंडा** अपने साथ ले आते हैं—ताकि उनका दोस्त हमेशा के लिए उनके साथ रह सके।

13 0
Trending on Paperwiff
Rakesh Nathani • 12 Oct, 2026 • 1 min read min

अंतिम संस्कार : लकड़ी

यहाँ इस कहानी का सबसे छोटा और सधा हुआ सार (Summary) है: यह कहानी एक रिटायर्ड प्रोफेसर और उनके बचपन के दोस्त (एक पेड़) की मार्मिक विदाई है। सालों बाद गाँव लौटने पर प्रोफेसर को पता चलता है कि हाईवे बनने के कारण कल उस पेड़ को काट दिया जाएगा। पेड़ बिना किसी शिकायत के अपनी मौत को स्वीकारता है और प्रोफेसर से अपना 'अंतिम संस्कार' करने को कहता है। अंत में, प्रोफेसर उसे काटने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। वे कुल्हाड़ी का लोहे वाला हिस्सा (जो मारने का प्रतीक है) वहीं छोड़ देते हैं और महज़ **लकड़ी का डंडा** अपने साथ ले आते हैं—ताकि उनका दोस्त हमेशा के लिए उनके साथ रह सके।

13 0