चिंगारी है नारी
कभी हाथ में ली कटारी है
Photo by Priscilla Du Preez on Unsplash
जो जीती ही है हर बार
नहीं कभी भी हारी है
वो खिलखिलाती सदा
हिम्मती सी नारी है।।
जौहर के ज्वाला में कूदी
कभी हाथ में ली कटारी है
वो मुखरित, बलशाली
चंचल मन ही नारी है।
आँचल में खुशियां सारी
कुपित हो तो चिंगारी है
सरसिज तक आकर्षण बनी
वो संगी साथी नारी है।।
भार्या बन, कभी दुहिता बन
जिंदगी सदा ही संवारी है।
कुपित हो तो कालिका सी
हर्षित हो तो फुलवारी है।।
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