Sawli zulfe

वो सादगी में भी क़हर ढाती हैं । सर्द की पहली धूप सी नज़र आती हैं । सांवली जुल्फ़े । हया से मिलके । जो वो खुल के मुसकुराती हैं । जिस से भी मिलती हैं , जीने का मकसद दे जाती हैं । ऐसी मिसाल हैं वो , जो आजकल कम पाई जाती हैं ।

Originally published in
Reactions 0
585
Shah  طالب  अहमद
Shah طالب अहमद 24 Jul, 2019 | 0 mins read

0 likes

Published By

Shah طالب अहमद

talib

Comments

Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓

Please Login or Create a free account to comment.