Republic day _2020

Happy republic day 2020

Shah  طالب  अहमद
26 Jan, 2020 • 1 min read • hi
❤️ 0 💬 0 👁 1009
Republic day _2020

71 सालों की आज़ादी से मोहब्बत बेशुमार रखते हैं ।

हिंदुस्तान के लिए हाथ ,पैर,जान,नफ़्स के लहू का कतरा कतरा बहाने को तैयार रखते हैं ।

वतन पे बुरी नज़र डालने वाले को परेशानियों में डाल रखते हैं ।

वक़्त पड़ने पर गोली खाने को हम अपनी पेशानी भी तैयार रखते हैं ।

वतन परस्ती की शमा दिल मे बरकरार रखते हैं।

ऐ हिंदुस्तान हम तुझपे अपनी जानिसार रखते हैं ।

तुजसे पैदा हो कि तुझसे मिलके का इख़्तेयार रखते हैं।

जो मिले ज़िन्दगी तो हिन्दुस्ता में मिले यही ख़्वाहिश हर बार रखते हैं

देश में अमन के ख़ातिर सेना को सदा होशियार रखते हैं ।

साथ ही अपने देश के दुश्मनो के दिल मे डर भी बरकरार रखते हैं।

*Shah Talib Ahmed*

0 likes
☕

Support Shah طالب अहमद

Appreciate this story? Send a small tip to encourage the author to write more great work!

Please login to tip the author.

Shah  طالب  अहमद
Published By

Shah طالب अहमद

@talib

Comments

Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓

Please Login or Create a free account to comment.

★ Recommended For You

Stories tailored to your recent reading preferences

More stories in Poetry
Rakesh Nathani • 15 Oct, 2026 • 1 min read

बागी : एक चेतना

शरीर हार्डवेयर है, चेतना उसका ऑपरेटिंग सिस्टम। बिना OS के फोन जैसे देह बेजान है। हम शरीर नहीं, चेतना हैं, यह बोध अहंकार मिटाता है। कर्म तय करता है कौन सा हार्डवेयर मिलेगा। जब चेतना डेवलपर से जुड़ती है, तो डर मिटता है, इंसान सदा अमर हो जाता है। के

17 0
More stories in Poetry
Saket Ranjan Shukla • 15 Oct, 2026 • 1 min read

एक परीक्षार्थी की व्यथा-कथा

A humorous Hindi poem titled “एक परीक्षार्थी की व्यथा-कथा” (The Ordeal of an Examinee), written from the perspective of a student sitting in an examination hall. It portrays the nervousness of facing an unfamiliar question paper, forgetting everything studied, struggling to write answers, watching the clock, worrying about unanswered questions, and fearing the results and parents’ reactions. Through witty expressions, relatable situations, and playful exaggeration, the poem captures the funny yet stressful experience of being an examinee.

37 0
More stories in Poetry
Rakesh Nathani • 12 Oct, 2026 • 1 min read

अंतिम संस्कार : लकड़ी

यहाँ इस कहानी का सबसे छोटा और सधा हुआ सार (Summary) है: यह कहानी एक रिटायर्ड प्रोफेसर और उनके बचपन के दोस्त (एक पेड़) की मार्मिक विदाई है। सालों बाद गाँव लौटने पर प्रोफेसर को पता चलता है कि हाईवे बनने के कारण कल उस पेड़ को काट दिया जाएगा। पेड़ बिना किसी शिकायत के अपनी मौत को स्वीकारता है और प्रोफेसर से अपना 'अंतिम संस्कार' करने को कहता है। अंत में, प्रोफेसर उसे काटने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। वे कुल्हाड़ी का लोहे वाला हिस्सा (जो मारने का प्रतीक है) वहीं छोड़ देते हैं और महज़ **लकड़ी का डंडा** अपने साथ ले आते हैं—ताकि उनका दोस्त हमेशा के लिए उनके साथ रह सके।

29 0
More stories in Poetry
Rakesh Nathani • 12 Oct, 2026 • 1 min read

अंतिम संस्कार : लकड़ी

यहाँ इस कहानी का सबसे छोटा और सधा हुआ सार (Summary) है: यह कहानी एक रिटायर्ड प्रोफेसर और उनके बचपन के दोस्त (एक पेड़) की मार्मिक विदाई है। सालों बाद गाँव लौटने पर प्रोफेसर को पता चलता है कि हाईवे बनने के कारण कल उस पेड़ को काट दिया जाएगा। पेड़ बिना किसी शिकायत के अपनी मौत को स्वीकारता है और प्रोफेसर से अपना 'अंतिम संस्कार' करने को कहता है। अंत में, प्रोफेसर उसे काटने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। वे कुल्हाड़ी का लोहे वाला हिस्सा (जो मारने का प्रतीक है) वहीं छोड़ देते हैं और महज़ **लकड़ी का डंडा** अपने साथ ले आते हैं—ताकि उनका दोस्त हमेशा के लिए उनके साथ रह सके।

26 0