साबरमती के संत

जिंदगी की सीख देती हुई साबरमती के संत की कहानी |

Surabhi sharma
03 Oct, 2021 • 1 min read min read • hi
❤️ 1 💬 0 👁 713
साबरमती के संत

जब छोटी थी तो गाँधी जी से जुड़ी कई कहानियाँ पढ़ी थी जिसमें से एक कहानी ने मुझे बहुत प्रभावित किया था वो कुछ इस तरह से थी - 


 "एक बार एक माँ अपने बेटे को गाँधी जी के पास लेकर आई और कहा इसे मीठा खाने की बहुत आदत है इसे कहिए मीठा खाना छोड़ दे, गाँधी जी ने कहा इसे कुछ दिन बाद मेरे पास लेकर आना, कुछ दिन बाद जब माँ अपने बेटे के साथ वापस गाँधी जी के पास आई तो गाँधी जी ने प्यार से बालक के गाल को थपथपाते हुए कहा ज्यादा मीठा खाने से दाँत और शरीर को नुकसान पहुंचता है अब से मीठा थोड़ा कम खाना, बालक की माँ ने पूछा बापू ये बात तो आप उस दिन भी बोल सकते थे जब मैं पहली बार आपके पास आई थी गाँधी जी ने कहा हाँ बोल सकता था पर उस समय तक मैं खुद मीठा बहुत खाता था तो उसको कैसे बोलता इतने दिनों में मैंने खुद मीठा खाना छोड़ा तब आज इसको समझाया "|


कहानी पढ़ने में साधारण सी है पर मुझे अपनी जिंदगी में कुछ बहुत महत्वपूर्ण बातें सीखा गयी|


 पहली सीख - बात छोटी हो या बड़ी गंभीरता से सही दिशा में उस बात पर सोचो |


दूसरी सीख - पहले तौलो फिर बोलो |


तीसरी सीख - जो बात या व्यवहार खुद को अच्छा न लगे वैसा दूसरे के साथ भी मत करो |


चौथी सीख - दूसरों को किसी भी प्रकार का उपदेश या सुझाव देने के पहले खुद को उसकी जगह पर रख कर देखो की तुम उस बात का कितना पालन करते हो |


और सबसे महत्वपूर्ण सीख ये मिली है इनके जीवन से की जिन्दगी मे जब कुछ बड़े निर्णय करने हों तो सिद्धांत के साथ व्यवहार पर और वर्तमान के साथ भविष्य पर भी विचार करो जिससे आपको या आपके आगे की पीढ़ी को आपके किसी निर्णय पर पछतावा या रोष न हो |


महान व्यक्तित्वों के बारे में कुछ भी लिखना सूरज को दीया दिखाना जैसा ही होता है, शब्दों में तो कभी इन प्रेरणापुंजों से मिलने वाले जिन्दगी की सीखों को बाँधा नहीं जा सकता सिर्फ बाँटा जा सकता है |

   

 धन्यवाद 

  सुरभि शर्मा 


1 like
☕

Support Surabhi sharma

Appreciate this story? Send a small tip to encourage the author to write more great work!

Please login to tip the author.

Surabhi sharma
Published By

Surabhi sharma

@surabhisharma

Comments

Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓

Please Login or Create a free account to comment.

★ Recommended For You

Stories tailored to your recent reading preferences

Trending on Paperwiff
Sonnu Lamba • 14 Oct, 2026 • 1 min read min

पंचम स्कंदमाता

नवरात्र का पांचवां दिन, मां स्कंदमाता का ध्यान

2 1
Trending on Paperwiff
Sonnu Lamba • 14 Oct, 2026 • 1 min read min

कूष्मांडेति चतुर्थकम्

नवरात्र का चौथा दिन, कूष्माण्डा मां का स्वरूप और अनाहत चक्र पर ध्यान।

2 1
Trending on Paperwiff
Rakesh Nathani • 12 Oct, 2026 • 1 min read min

अंतिम संस्कार : लकड़ी

यहाँ इस कहानी का सबसे छोटा और सधा हुआ सार (Summary) है: यह कहानी एक रिटायर्ड प्रोफेसर और उनके बचपन के दोस्त (एक पेड़) की मार्मिक विदाई है। सालों बाद गाँव लौटने पर प्रोफेसर को पता चलता है कि हाईवे बनने के कारण कल उस पेड़ को काट दिया जाएगा। पेड़ बिना किसी शिकायत के अपनी मौत को स्वीकारता है और प्रोफेसर से अपना 'अंतिम संस्कार' करने को कहता है। अंत में, प्रोफेसर उसे काटने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। वे कुल्हाड़ी का लोहे वाला हिस्सा (जो मारने का प्रतीक है) वहीं छोड़ देते हैं और महज़ **लकड़ी का डंडा** अपने साथ ले आते हैं—ताकि उनका दोस्त हमेशा के लिए उनके साथ रह सके।

13 0
Trending on Paperwiff
Rakesh Nathani • 12 Oct, 2026 • 1 min read min

अंतिम संस्कार : लकड़ी

यहाँ इस कहानी का सबसे छोटा और सधा हुआ सार (Summary) है: यह कहानी एक रिटायर्ड प्रोफेसर और उनके बचपन के दोस्त (एक पेड़) की मार्मिक विदाई है। सालों बाद गाँव लौटने पर प्रोफेसर को पता चलता है कि हाईवे बनने के कारण कल उस पेड़ को काट दिया जाएगा। पेड़ बिना किसी शिकायत के अपनी मौत को स्वीकारता है और प्रोफेसर से अपना 'अंतिम संस्कार' करने को कहता है। अंत में, प्रोफेसर उसे काटने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। वे कुल्हाड़ी का लोहे वाला हिस्सा (जो मारने का प्रतीक है) वहीं छोड़ देते हैं और महज़ **लकड़ी का डंडा** अपने साथ ले आते हैं—ताकि उनका दोस्त हमेशा के लिए उनके साथ रह सके।

13 0