मोहब्बत तो आज भी मोहब्बत ही है कहलाती

It's about true love. No matter what obstacles arise, true love always wins at the end.

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Srinidhi
Srinidhi 19 Jun, 2020 | 1 min read
Classic Romance Love True love


ज़माना चाहे कितना ही क्यों ना बदल जाए,

दीवारें और दायरे जितने भी क्यों ना निकल आए,

सच्चे इश्क को आखिर कहां कुछ रोक पाए।

लोगों जितने भी तर्क लगाए,

जुदाई के जितने भी आलम बिछाए,

पर हर ज़माने में सच्ची मोहब्बत, एक साथ ही रंग लाए।

ज़रा गौर फरमाओ, कृष्ण के साथ सबसे पहले मन में है राधा का ही है जतन,

सब जानते है मुरली की धुन पे नाची थी मीरा होकर मगन,

पर देखो तो कितनों को है कृष्ण की अर्धांगिनी का ज़हन‌।

आज भी हलक से लैला के बाद मजनू ही निकलता है,

रोमियो के साथ तो जुलियट ही सजता है,

सलीम का इश्क देखो, आज भी अनारकली में बसता है।

शाहजहां ने मुमताज़ के लिए ताज महल बनवाया,

संयुक्ता ने पृथ्वीराज के लिए जौहर फ़रमाया,

रांझे के लिए हीर ने भी जुल्म उठाया।

राम के लिए सीता अग्नि परीक्षा से गुजर आई,

रानी पद्मावती ने भी आग में अपनी जान गंवाई ,

आसमान ने भी रंग बदला और बाजीराव के साथ मस्तानी भी दुनिया छोड़ पाई।

इतिहास गवाह है कि सच्ची मोहब्बत हमेशा साथ रंग लाती है,

जमीन पे नहीं तो जन्नत में मुकम्मल हो जाती है,

पर दो प्रेमियों के नाम की धुन, हलक से एक साथ ही निकल कर आती है।

वक्त बीतता गया, करके कुछ हसीं सितम,

ज़माने बदले, और नए दायरे- दस्तूर ने लिए जन्म,

पर इश्क के मायने ना हुए कम।

वक्त बदलने से मोहब्बत नहीं बदल जाती ,

हर ज़माने में मोहब्बत तो मोहब्बत ही है कहलाती ।

हर ज़माने में मोहब्बत तो मोहब्बत ही है कहलाती ।

-श्रीनिधि



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