वाणी दोष

वाणी दोष कैसे घटित होता है ,पढि़ए ये कहानी और इसके बाद मैं इस दोष के निराकरण हेतू एक लेख भी लिखूंगी ,उसे भी फोलो किजीएगा..!!

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Sonnu Lamba
Sonnu Lamba 01 Oct, 2021 | 1 min read
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मैं ये सब डिजर्व नहीं करता ,

डिस्गस्टिंग ...!

मेरे साथ कोई ऐसा कैसे कर सकता है ,मुझे ठुकरा कर देखो कैसे चली गयी वो ,एक पल भी नहीं लगा उसे ...!

क्या नही है मेरे पास भरी थाली में ठोकर मार गयी है ,ये घर , स्टेटस , गाडी ...रूतबा ,सभी कुछ तो है ,

:बेटा ...वो मैने आज तेरी कुंडली दिखायी थी एक ज्योतिषी को तो उन्होने कहा कि ....

वाणी दोष है ....कुंडली में ,"


वाणी दोष ...माई फुट ..!


मेरे एक बोल पर लोग पानी भरते हैं और ये पंडित ,भूल हुई है उसे देखने में ,


"नहीं बेटा उनकी गणना बहुत सटीक है ,वे ..."


मांँ पूरी बात भी नहीं बोल पाई कि बेटा बीच में ही बोल पडा ,मांँ तुम भी ना गंवार कि गंवार ही रहोगी ,वाणी दोष से इस सबका क्या समबन्ध ...?

क्या होता है ये वाणी दोष ..?

ये वाणी दोष ,वही होता है जिसमें तू ना कभी मुझसे आदर से बोला और ना कभी बहू से , हांँ वो चली गयी क्योंकी उसके पास ओप्शन था जाने का ,मेरे पास नहीं है ,तो मैं नहीं गयी ,बस इतना ही फर्क है ,

ये बंगला , गाडी ,स्टेटस भले ही तूने मेहनत से एचीव किये हों या किसी पुण्य कर्म का प्रताप हो लेकिन प्यार और सम्मान से भरी बोली ही किसी को पास लाती है और दुत्कार और अहम से भरे वचन दूर ले जाते हैं , 

तुझे ये बात सीखनी ही पडे़गी , मैनें पहले भी कईं बार तुझे समझाने की कोशिश की है ,

आत्म सम्मान सभी को प्यारा होता है चाहे कोई तुम्हारा नौकर ही क्यों न हो ,अपने अहम को पुष्ट करने के लिए तुम रोज रोज किसी का आत्मसम्मान कुचल नहीं सकते , मांँ ने ये सब बहुत जोर देकर बोल दिया और एक झटके में कमरे से बाहर निकल गयी ,

बाहर बैठक में पंडित जी बैठे थे ,

उन्हे देखकर थोडा सामान्य होते हुए बोली ,

"नमस्कार पंडित जी ,"

बताइयें क्या क्या सामग्री की जरूरत है वाणी दोष के उपाय के लिए ,

अब किसी सामग्रीं की जरूरत नहीं है शंकुतला जी ,

पचास प्रतिशत इलाज तो आपने कर दिया है ,कोई भी घटना जीवन में कुछ सिखाने के लिए ही होती है ,अगर आज आपके बेटे पर आपकी बातो का असर हुआ होगा तो अब वो खुद ही इस पर काम करेगा ,बस आप इसी तरह सही को सही और गलत को गलत कहती रहिए , और हांँ थोडा़ प्यार से ,नहीं तो आपकी सेहत खराब हो जायेगी ,मैं जानता हूं ,मांँ ..बच्चों को बहुत मजबूरी में डांँटती हैं और फिर खुद ही दुखी होती है ,ग्रहों से कभी भूल नहीं होती , हम ही उनका इशारा समझकर सुधार नहीं कर पाते ..!

मैं चलता हूं ..जय राम जी की ..!

जी , कुछ खाकर जाइये ,मैं अभी जलपान का प्रबन्ध करती हूं ,आपने मुझे इस घटना को देखने का नया नजरिया दिया है ,नहीं तो मैं भी बहू की ही गलती समझ रही थी ,आप एहसास न कराते तो ,कहांँ समझ पाती मैं ..बहुत बहुत आभार आपका ,लिजीए ये कुछ फल और मिठाई ग्रहण कीजिए ..!!

©®sonnu lamba

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